हाईकोर्ट में केवल 9 फीसदी है महिला जजों की संख्या

November 10, 2018, 12:04 PMYug Jagran
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युगत जागरण न्यूज़ नेटवर्क

भारत के लिए अप्रैल 2017 बेहद ऐसिहासिक था जब देश के बड़े हाईकोर्ट दिल्ली मुंबई चेन्नई और कोलकाता की मुख्य न्यायाधीश महिलाएं थीं। लेकिन इसी बीच एक निराश करने वाले आंकड़े सामने आए हैं। हमारे देश के हाईकोर्ट में महिला जजों की संख्या महज 9 फीसदी है। देश के लिए 9 फरवरी साल 1959 का दिन भी बेहद खास था तब देश को उसकी पहली महिला हाईकोर्ट जज अन्ना चंडी (केरल) मिलीं। साल 2017 में दो सप्ताह से भी कम वक्त तक मंजुला चेल्लूर जी रोहिणी निशिता निर्मल म्हात्रे और इंदिरा बनर्जी देश के चार बड़े न्यायालयों- बॉम्बे दिल्ली कोलकाता और मद्रास की मुख्य न्यायाधीश रहीं।लेकिन यह क्रम 13 अप्रैल 2017 को टूट गया। जब जस्टिस रोहिणी रिटायर्ड हो गईं। उसी साल जस्टिस म्हात्रे 19 सितंबर और जस्टिस चेल्लूर 4 दिसंबर को सेवानिवृत्त हो गईं। वहीं जस्टिस बनर्जी को भी सुप्रीम कोर्ट में जज बनाया गया है यानी अब वह भी हाईकोर्ट की जज नहीं रहीं।एक न्यूज वेबसाइट के मुताबिक देश में कुल 24 हाईकोर्ट हैं जिनमें जजों की अनुमति 1221 है। लेकिन उनकी संख्या महज 891 है। यह आंकड़े 1 अक्तूबर तक के हैं। हाल ही में जजों की नियुक्ति के लिए 70 नामों को अनुमोदित किया गया है। मौजूदा कार्यरत 891 जजों में महिलाओं की संख्या महज 81 है। 68 सालों में महज 8 महिला जजों की नियुक्ति यूं को बीते एक साल में 20 से अधिक महिला जजों की नियुक्ति हुई है लेकिन यह आंकड़ा भी आने वाले समय में कम हो जाएगा। इसका कारण यह है कि या तो इन महिला जजों को मुख्य न्यायाधीश बनाया जाएगा या फिर इनकी नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट में हो जाएगी। आंकड़ों से पता चलता है कि सुप्रीम कोर्ट में भी महिला जजों की संख्या कम है। यहां बीते 68 सालों में महज 8 महिला जजों की नियुक्ति हुई है।

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