अभिमतआलेख

आप का कचरा आप को मुबारक

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क

बहुत दिनों से समाचार पत्र के दफ़्तर जाना नहीं हो पा रहा था।सोचा आज निकल ही लेते हैं। कोरोना के चलते कहीं पर भी आना जना जरा कम ही हो गया है।अपनी क्रियाशीलता के साथ ही गाड़ी का चलना भी उतना ही जरूरी लग रहा था। खड़ी गाड़ी मरम्मत तथा रखरखाव कुछ ज्यादा ही मांगती है। यही विचार करते हुए जल्दी-जल्दी घर के काम निपटाये फिर भी बारह तो बज ही गया। आज काफी दिन बाद साफ सुथरी चमचमाती गाड़ी लेकर घर से निकलना हुआ ।जैसे व्यवस्थित तथा साफ सुथरे स्त्री करे हुए कपड़ों में एक अलग ही आत्मविश्वास का होना महसूस होता है वैसे ही साफ सुथरे वाहन से कार्यालय या कहीं और जानें में आत्मविश्वास के साथ ही एक सुखद अनुभूति का भी एहसास होता है।घर से निकल कर अभी कुछ ही दूरी का सफर तय करा होगा कि यह क्या कचरे से भरी प्लास्टिक की थैली कार के सामने वाले कांच पर  जोरदार आवाज के साथ टकराकर बिखर गई। उस प्लास्टिक की थैली में खाने पीने के सामान जिसमें शायद कोई दाल और सब्जी रही हो जिसके कारण आगे के कांच तथा सामने वाले हिस्से पर गंदगी फैल गई।अप्रत्याशित रूप से हुई इस घटना से कुछ पल के लिए दिल और दिमाग को झटका लगा कि यह क्या हो रहा है।और गाड़ी वहीं रोक दी यह जानने के लिये की आखीर माजरा क्या है। एक प्लास्टिक की थैली भर कर गंदगी आने के बाद भी दिवार की दूसरी तरफ से लगातार कचरा एवं गंदगी फेंकी जा रही थी। उस कचरे नुमा गंदगी में सब्जियों एवं फलों के छिलके के अलावा बचा हुआ खाना पुराने जूते चप्पल,खाली रेपर तथा शीशियां और भी अन्य चीजों के साथ कुछ ऐसा सामान भी जिसके नाम का यहां उल्लेख करना उचित नहीं होगा। इस अकारण और अप्रत्याशित घटना नें मुझे परेशान कर दिया और बहुत कुछ सोचने पर मजबूर भी कर दिया।अब मैं दिवार के पीछे पहुंच चुकी थी जहां से कचरा एवं गंदगी बीच सड़क पर फेंकी जा रही थी। सफाई करने वाला वह अधेड़ व्यक्ति बिना यह जाने की दिवार के उस पार सड़क पर जो कचरा वह फेंक रहा है वह कहां और किस पर गिर रहा है।वह अपने काम में लगा हुआ है। इसके साथ ही वह कुछ बड़बड़ा भी रहा है। मैं दिवार के पार पहुंचकर उसे देख रही हूं और समझने का प्रयास कर रही हूं कि जब कॉलोनी के प्रत्येक घर पर नगर निगम की कचरा गाड़ी रोजाना नियत समय पर आती है और कचरा लेकर जाती है फिर यह आदमी बीच सड़क पर कचरा क्यों फेंक रहा है। मुझे देखते ही उसने कहा नमस्ते मैडम जी आप यहां कैसे कुछ काम था क्या।अब मैं ना तो उस पर हंस पा रही हूं और ना ही उसके उपर गुस्सा कर पा रही हूं।मैंने कहा हां भैया सोचा आपके काम में आज मैं भी हाथ बटा लूं। अब उसका बोलना शुरू हो गया। मोहल्ले की औरतें बड़े-बड़े मकान बना लेती हैं । दिमाग दो कौड़ी का नहीं है। नगर निगम की कचरा गाड़ी रोज सुबह घर-घर आती है कचरा उठाने।उसको कचरा देने में जोर लगता है इन औरतों को।रात के अंधेरे में घूमने के बहाने निकलती हैं और कचरा खाली प्लाट देख दिवार के उस पार से इस पार फेंक देती हैं।प्लाट का मालिक मेरी जान खाता है। कि मैं सफाई नहीं रखता। कहां तक दूसरों के घरों की गंदगी इकट्ठी करके कचरा गाड़ी को देता रहूं। आज से मैंने तय कर लिया है कि मैं भी बीच सड़क में ही कचरा फेकूंगा। तुम्हारे घर का कचरा और गंदगी तुम्हें मुबारक। कम से कम इन औरतों को शर्म तो आयेगी। अब मैंने बात को दूसरी तरफ मोड़ते हुए पूछा की भैया यह बताओ क्या आपने किसी महिला को यहां कचरा फेंकते हुए देखा है। यदि नहीं देखो है तो वह कोई पुरुष भी तो हो सकता है। वह मानने के लिये तैयार नहीं हुआ कि पुरुष इस तरह का कृत्य कर सकते हैं।औरतें घर का काम करती हैं इसलिये कचरा तो औरतें ही रात के अंधेरे में फेंक रही हैं। बहस को यहीं विराम देते हुए मैंने उससे कहा सड़क पर मेरी गाड़ी मैं साईड में लगा कर आयी हूं एक बाल्टी पानी लेकर चलो आपने जो कचरा फेंका था उससे सामने वाला कांच और गाड़ी का कुछ हिस्सा गंदा हो गया है। उसे धोना है। और लौटते समय बीच सड़क पर फैला हुआ कचरा उठा लेना। मैं कोशिश करूंगी की कॉलोनी के किसी भी घर से कचरा यहां नहीं फैंका जाये। और कचरा नगर निगम की कचरे वाली गाड़ी में ही डाला जाये। अब वह मेरे साथ पानी से भरी बाल्टी और कचरा इकट्ठा करने के लिये एक बोरी लेकर चल रहा है। रास्ते में उसने मुझसे कहा मैडम आप किसी से कुछ मत कहना मैं प्लाट के मालिक से बोलकर कैमरा लगवाता हूं और फिर उस कचरा फेंकने वाली को पकड़ कर अच्छी तरह सुनाता हूं। मेरे मन में तो आया कि फिर से एक बार कह दूं कि जरूरी नहीं कि हर बार कोई महिला ही इस प्लॉट पर कचरा फेंक रही हो कोई पुरुष भी तो ऐसा कर सकता है। लेकिन एक बार फिर यह सोच कर चुप हो गई की यह मेरी बात मानेगा तो है नहीं।फिर बोलने से कोई फायदा नहीं।हां उस दिन मैंने मोहल्ले के कुछ सभ्य लोगों के मध्य इस बात को रखा की प्रत्येक परिवार यह कोशिश करे की कचरा नगर निगम की कचरे वाली गाड़ी में ही डाला जाये और किसी वज़ह से यदि उस दिन का कचरा कचरे वाली गाड़ी में नहीं डाल पाये तो उस दिन का कचरा घर में ही रखें और अगले दिन उसे कचरे वाली गाड़ी में डालें ना कि किसी के खाली प्लॉट पर या यहां वहां फेकें।और अपनी बात कहने के पीछे भी यही मंशा छुपी हुई है कि लोग कचरा यहां वहां ना फेंकें।

श्रीमती रमा निगम

 वरिष्ठ साहित्यकार भोपाल म.प्र.

 nigam.ramanigam@gmail.com 

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