आलेख

एक नजर इधर भी, शारदीय नवरात्र पर विशेष

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क

(गौरीशंकर पाण्डेय सरस)

जखनियां/गाजीपुर : हमारे देश में नवरात्रि का पर्व साल में दो बार मनाया जाता है।पहला, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष में दूसरा चैत्र मास के शुक्ल पक्ष में। दोनों नवरात्रों में नौ दिन शक्ति की महा उपासना श्रद्धा और विश्वास के ‌साथ की जाती है। आश्विन मास में नव दिन बाद दसवें दिन दशहरा अथवा विजय दशमी  पर्व जो असत्य पर सत्य का पाप पर पुण्य का उत्सव मनाया जाता है।इसी तरह चैत्र मास के शुक्ल पक्ष में नवरात्रि में नव दिन बाद रामनवमी का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। शारदीय नवरात्र में नौ दिनों तक मां दुर्गा की पूजा अर्चना के पीछे धार्मिक मान्यता है कि  अजेय रावण के बध के निमित्त भगवान राम ने शक्ति की आराधना की थी। श्रद्धा और विश्वास के साथ नव दिन विधि विधान से पूजनोपरांत दशवें दिन दश शीष धारी  दशानन अर्थात लंका के राजा रावण पर भगवान श्रीराम ने विजय प्राप्त किया।तभी से शारदीय नवरात्र पर मनाने का‌ प्रचलन प्रारंभ ‌हुआ।जिसका प्रतीकात्मक स्वरूप आज भी रामलीला मंचन में देखने को मिलता है।नौ रात्रि पर्व में नौ दिनों तक विशेष रूप से माता दुर्गा के भक्त विविध रूप जैसे मंत्र जप साधना पूजा आराधना स्तुति पाठ आदि श्रद्धा भाव से माता आदिशक्ति का ध्यान करते हैं।

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