अभिमतआलेख

ऑक्सीजन की आपदा- परिवर्तित परिस्थितिकीय

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क

वर्तमान समय में स्वास्थ्य सेवाओं का मूल्यांकन करने से संदर्भित होता है कि भारतवर्ष में स्वास्थ्य मोर्चे पर अघोषित आपातकाल जैसी भयावह स्थिति उत्पन्न हो गई है। महामारी के दौरान भारत ने दवाइयों के उत्पादन में अग्रणी भूमिका निभाई है। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए आज अस्पताल प्रबंधन ऑक्सीजन की कमी की गुहार अग्रिम रुप से करने लगे हैं। इसका एक प्रमुख कारण समय से स्वास्थ्य सेवाओं के लिए ऑक्सीजन समय पर न पहुंचना पाना जबकि देश में ऑक्सीजन की कमी नहीं है। ऑक्सीजन की कमी का कुप्रबंधन इस बात की ओर इंगित करता है समन्वय कि कहीं ना कहीं कमी रह गई है। निःसंदेह ऑक्सीजन की कमी की चीख-पुकार अस्पतालों में सुनाई पड़ रही है। अस्पतालों की अपनी सीमित क्षमता, ऑक्सीजन की मांग में अत्यधिक वृद्धि प्रशासन के लिए बहुत हैं चिंता का विषय है। वितरित ऑक्सीजन प्रणाली कितनी उचित है या कितनी अनुचित है इसकी जांच की जा सकती है। सैद्धांतिक दृष्टि से हम सरकार को चाहे जितना विवेक पूर्ण मान लें व्यावहारिक दृष्टि से सरकार के आदेश और कानून सर्वगुण संपन्न नहीं हो सकते। सरकार की ऑक्सीजन वितरण प्रणाली को परम पावन मानकर उनका पालन करना नागरिकों के स्वास्थ्य हितों के अनुकूल नहीं उसके प्रतिकूल भी है। ऑक्सीजन कमी संकल्पना सामान्य हित के स्वास्थ्य का विचार नहीं है। यह तो सरकार का राजनीतिक दायित्व बनता है की जनमानस के स्वास्थ्य का ध्यान देते हुए राज्य के प्रत्येक नागरिक जो महामारी से पीड़ित है ऑक्सीजन उपलब्ध कराएं। केंद्र सरकार सभी राज्यों के साथ समानता का व्यवहार करें सभी राज्यों को एक समान मूल्य पर ऑक्सीजन और जरूरतमंद दवाएं उपलब्ध कराएं। सरकार सामान्य हित की चेतना से ओतप्रोत होकर अपने कर्तव्यों को स्वीकार करें, सरकार स्वयं से आत्म साक्षात्कार करें की वर्तमान परिस्थितियों में महामारी की भयावह स्थिति से से निपटने के लिए क्या मानदंड हमको अपनाना चाहिए। सरकार ऑक्सीजन की कमी को दरकिनार कर रही है मल्टी मीडिया व प्रिंट मीडिया के माध्यम से “सूचनाओं का झूठा गट्ठर प्रेषित कर रही है कि हमारे देश में ऑक्सीजन की कतई कमी नहीं है।सरकार को तर्कबुद्धिवाद अपनाना चाहिए कि किसी देश की आपातकालीन निर्दिष्ट समस्या का समाधान त्वरित हो। देश में समस्या भी है, साधन भी है, और उसका समाधान भी है। साध्य को प्राप्त करने के लिए राजनीतिक साहचर्य को अपनाना चाहिए ताकि ऑक्सीजन की कमी की समस्या को दूर किया जा सके। ऑक्सीजन की आपूर्ति को बाजार प्रणाली से दूर रखना चाहिए ताकि सभी राज्यों को समान रूप से ऑक्सीजन की आपूर्ति हो सके। एक लोकतांत्रिक कल्याणकारी राज्य का परम राजनीतिक दायित्व बनता है कि वह अपने नागरिकों को जन्म से लेकर मरघट तक जीवन स्वतंत्रता का अधिकार प्रदान करें। साथ- साथ नागरिकों का पूर्ण दायित्व भी बनता है कि राज्य के कल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित हो और सरकार का सहयोग करें। प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर भारत जैसे विशाल देश में ऑक्सीजन आयात करना “तुच्छ भौतिक संतुष्टि” का परिणाम है। अब समय आ गया है मनुष्य को प्रकृति के सौंदर्य को पहचान कर उसका प्राकृतिक आनंद लेना चाहिए। भविष्य में प्रकृति का दोहन पेड़ों की अंधाधुंध कटाई, पहाड़ों की नंगी पीठे , इस बात का द्योतक हैं कभी ना कभी सृष्टि का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा।
अध जली आग से जलती लाशें धुएं के घेरे को मुक्त नहीं कर पा रही हैं।
अश्रु नयन छलकते है
श्रद्धांजलि देते – देते।
और कितना शेष अभी
मन में विचार यही उमड़ते।।

मौलिक लेख
सत्य प्रकाश सिंह
केसर विद्यापीठ इंटर कॉलेज प्रयागराज उत्तर प्रदेश

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