कांग्रेस पार्टी जानना चाहती है कि मोदी जी आपको बच्चों और नौजवानों की चिन्ता क्यों नहीं: प्रमोद तिवारी

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। केन्द्रीय कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य तथा आउटरीच एंड को-ऑर्डिनेशन कमेटी, उत्तर प्रदेश के प्रभारी प्रमोद तिवारी ने कहा है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय को लख- लख बधाइंया, धन्यवाद और स्वागत। कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने देश की सबसे गम्भीर और मानवीय समस्या पर विचार किया। और केन्द्र सरकार की कोरोना वैक्सीनेशन नीति को मनमाना और तर्कहीन कहकर संबोधित किया। माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि केन्द्र सरकार 31 दिसम्बर, 21 तक जो सबको वैक्सीन के टीके लगाने की बात कर रही है उसका ‘‘रोडमैप’’ क्या है ? अब तक जब कांगे्रस पार्टी यह सवाल उठा रही थी या विपक्ष के लोग यह बात कह रहे थे तो भारतीय जनतापार्टी कह रही थी कि कांगे्रस पार्टी और विपक्ष इस पर राजनीति कर रहे हैं, किन्तु जब धरती के माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने इसे तर्कहीन और मनमाना निरूपित कर दिया है और पूरी तरह अपने को असंतुष्ट बताया है। कोरोना के खिलाफ लड़ाई में सरकार की नीतियों में सीधे हस्तक्षेप करने से बचने केन्द्र सरकार के आग्रह पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि जब कार्यपालिका की नीतियों से नागरिकों के संवैधानिक अधिकार बाधित हो रहे हों तो उस स्थिति में संविधान ने कोर्ट को मूकदर्शक नहीं रखा है, नीतियों की न्यायिक समीक्षा करना कोर्ट का कर्तव्य हो जाता है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने वैक्सीन की खरीद का शुरूआत से लेकर अब तक का ब्यौरा देने को कहा है और जनसंख्या के हिसाब से ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के लोगों का टीकाकरण भी मांगा है। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि कोवैक्सीन, कोविशील्ड और स्पूतनिक वी के टीकों की खरीद का आॅर्डर केन्द्र सरकार ने कब- कब दिया उसका तारीख के साथ पूरा ब्यौरा बताये और कितने टीकों का आॅर्डर दिया। मा. सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी केन्द्र सरकार से जानना चाहा है कि पहले, दूसरे और तीसरे चरण में शेष बचे लोगों का टीकाकरण कब होगा ? इसकी रूपरेखा भी केन्द्र सरकार को पेष करने को कहा है। इसके साथ ही साथ केन्द्र सरकार यह भी बताये कि बजट में निर्धारित 35,000 (पैंतीस हजार) करोड़ रुपये में से अब तक कितने खर्च हुये हैं ? श्री तिवारी ने कहा है कि अब तो एक बात साफ हो जाती है कि कांगे्रस पार्टी की चिन्ता देशहित में थी और भारतीय जनतापार्टी की चिन्ता देष के लोगों को अंधकार में रखकर अपना राजनैतिक लाभ साधना था, केन्द्र सरकार की नीतियों को तर्कहीन और दिशाहीन मानते हुये माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने कांगे्रस की चिन्ता पर मोहर लगायी है। आज जब देश की संपूर्ण आबादी के लगभग 3ःको वैक्सीन लगी है तो फिर लगभग 120 करोड़ बचे देश वासियों को वैक्सीन लगाने का रोडमैप क्या है श्री तिवारी ने कहा है कि कल ही कांगे्रस पार्टी के नेतृृत्व ने और अखिल भारतीय कांगे्रस की महासचिव, तथा उत्तर प्रदेश प्रभारी प्रियंका गांॅधी के आह््वान किया था कि सबको निःशुल्क टीका (यूनिवर्सल वैक्सीनेशन) लगे, कांगे्रस पार्टी ने जो कार्यक्रम चलाया था माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने वहीं चिन्ता व्यक्त की है । मोदी- योगी आपके पद के प्रति पूरा सम्मान व्यक्त करते हुये पंूूॅछना चाहता हंूूॅ कि आप लोगों को 18- 44 वर्ष नौजवानों की चिन्ता और फिक्र क्यों नहीं है ? आप क्यों युवा भारत की सुरक्षा नहीं करते हैं ? आज माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने आपकी नीतियों को फटकार लगाते हुये पंूूॅछ ही लिया कि ‘‘जब 60 वर्ष के ऊपर के लोगों का टीकाकरण निःशुल्क है तो फिर 18- 44 वर्ष या बच्चों से मनमाना दाम क्यों वसूला जा रहा है ?माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी जानना चाहा है कि एक देश में अलग- अलग राज्यों में, अलग- अलग आयु के लोगों में अलग- अलग दाम क्यों निर्धारित हैं ? इससे किसको आप फायदा पहंुॅचाना चाहते हैं ?कांगे्रस पार्टी जानना चाहती है कि मोदी जी आपको बच्चों और नौजवानों की चिन्ता क्यों नहीं है ? आपकी चिंता पूंजीपतियों की तिजोरियाँ भरने की तरफ लग रही है। मोदी जी ! देश की आने वाली पीढ़ियां केन्द्र सरकार के इस निर्णय के लिये आपको कभी माफ नहीं करेगी। कोरोना के जब पहली लहर के बाद दूसरी लहर आने की घोषणा हो गयी थी तो आपने भारत के लोगों को लगने वाली वैक्सीन बाहर के 72 देशों को भेजने की इजाजत क्यों दी ? आपने खुद डाबोस (स्वीटजर लैण्ड) में कान्फे्रंस में कहा था कि सभी को वैक्सीन बनाने दी जाय। किन्तुभारत में देश में जहां के आप निर्वाचित प्रधानमंत्री हैं तो वहां इस नीति का पालन स्वयं क्यों नहीं करते ? यदि उन कम्पनियों को जिनमें दक्षता और क्षमता है यदि उन्हें वैक्सीन बनाने देते तो शायद आज देश मे कई घर न उजड़े होते ? न इतनी मौतें होती और न ही नदियों में हजारों की संख्या में शव बहते हुये दिखाई देते, तथा नदियों के किनारे बिना भारतीय धर्म का पालन किये शव न दफनाये जाते। मोदी अब तो यह स्पष्ट हो गया है कि कोविड- 19 से मौतों व संक्रमितों की संख्या बढ़ने का मुख्य कारण यह है कि आपकी सरकार ने गलत, अविवेकपूर्ण, गैर वैज्ञानिक सोच थोपी, तथा नये- नये प्रयोग किये, और उसकी कीमत देश के लाखों परिवारों ने अपनी बलि देकर चुकाई। मोदी जी ! कोविड-19 से लड़ना चुनाव प्रचार करना नहीं है, आपकी आत्मा क्यों नहीं जागी ? जब बिहार और पश्चिम बंगाल में आपके सामने हजारांे की भीड़ बिना सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुये, बिना मास्क लगाये खड़ी थी तो आपने ऐसी मीटिंग, जनसभा को क्यों सम्बोधित किया ? यदि सभा में महामारी के नियम टूट रहे थे तो देश का प्रधानमंत्री और उत्तर प्रदेश राज्य का मुख्यमंत्री उस मीटिंग का भागीदार कैसे हो सकता है ? और मूकदर्शक बना रह सकता है। यह अक्षम्य, दुःखद और दुर्भाग्यपूर्ण है, गैर वैज्ञानिक कदम था जो आप दोनों ने उठाये। श्री तिवारी ने कहा है कि कल अमेरिका की उप राष्ट्रपति और भारतीय मूलवंश की श्रीमती कमला हैरिस जी से भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने फोन पर वार्ता की। वार्ता के बाद इसे कूटनीतिक विजय बताते हुेये उन्होंने कहा कि अमेरिका ने भारत को कोविड- 19 की वैक्सीन देने की बात कही है। अमेरिका, दुनिया के लगभग 19 देशों को कोविड-19 के टीके दे रहा है जिनमें भारत, कनाडा, मैक्सिको और कोरिया को लगभग 70 लाख टीके की खुराक दे रहा है, इस तरह भारत को बहुत कम टीके मिल रहे हैं ।श्री तिवारी ने कहा है कि दुःख होता है, एक भारतीय होने के नाते मैं विदेश के संबंधों पर भरपूर समर्थन सरकार को देता हूँ किन्तु सवाल उठता है कि हमारे देश वासियों और देश के बच्चों को लगने वाली वैक्सीन दुनिया के 72 देशों को क्यों बांटी गयी ? और अब उसी वैक्सीन को लाने के लिये तमाम राष्ट्रों के सामने हाथ जोड़कर अनुनय विनय कर रहे हैं, और वह भी तब, जब भारत के विदेश मंत्री एक सप्ताह तक अमेरिका में कैम्प कर रहे थे । क्या तब भी अमेरिका के राष्ट्रपति, भारत के प्रधानमंत्री से बात करने को तैयार नहीं हुये ? जो उन्हें अमेरिका की उप राष्ट्रपति से बात करनी पड़ी। शायद कहीं न कहीं कूटनीतिक तनाव अवष्य है कि प्रधानमंत्री ने जो अमेरिका में जाकर तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का चुनाव प्रचार किया था और अहमदाबाद में उनका प्रचार किया था, तथा एक साधारण कार्यकर्ता की तरह नारा लगाया था कि ‘‘अबकी बार-ट्रंप सरकार’’। श्री तिवारी ने कहा है कि ये भारत की स्थापित विदेश नीति से पलायन था, देश के प्रधानमंत्रीरहे पं. जवाहर लाल नेहरू जी, स्व. इंदिरा गांधी जी, स्व. राजीव गांधी जी एवं स्व. अटल बिहारी बाजपेयी जी ने भारत की विदेश नीति का पूरी तरह से पालन किया था कि भारत किसी भी देश के अंतर्राष्ट्रीय मामलों में या वहां के चुनाव में दखल नहीं देगा। मोदी जी को इससे बचना चाहिए था, ऐसा करके उन्होंने भारत का अहित किया है, और आज उसकी कीमत देश को चुकानी पड़ रही है। क्या यह महज इत्तेफाक हो सकता है ? कि हमारे माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी जिस भी देश के नेता से मिले वह अब कुर्सी पर नहीं है, चाहे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ हो, यहां बिना बुलाए चले गये थे,चाहे नेपाल के प्रधानमंत्री हों, चाहे जापान के हो, और अब तो दुनिया के कई देषों के राष्ट्राध्यक्षों की कुर्सी भी खतरे में है और शायद इसीलिये कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष भारत को निमंत्रण भी नहीं भेज रहे हैं।




