कला-साहित्यविचार
” चूड़ियां”

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क
हाथों में खनकती है जब-जब,
संगीत की धुन सी लगती है|
हाथों का वह श्रृंगार करें,
मनमोहक प्यारी लगती हैI
सतरंगी छटा बिखेर रही,
करती है अलंकृत यौवन को,
सौभाग्य का वह प्रतीक बनकर,
महका देती है तन मन को|
हर रंगों की वो रानी बन,
कलरव करती है हाथों मेंI
जीवन की मधुर कहानी बन,
वह घुल जाती है सांसों में|
है मधुर प्रणय का वह प्रतीक,
मधुमय करती है जीवन कोI
सौभाग्य का वह बनकर प्रतीक,
महका देती है तन मन कोI
स्वरचित, अप्रकाशित एवं मौलिक रचना
लेखिका /रचनाकार: रीता तिवारी ” रीत”
संप्रति: अध्यापिका, स्वतंत्र लेखिका एवं कवयित्री
शिक्षा: एमए समाजशास्त्र, बीएड, सीटीईटी उत्तीर्ण
पिता का नाम: श्री अवधेश तिवारी
मऊ ,उत्तर प्रदेश से




