छाबी तालाब की हजारों मछलियां मरीं, संदेह और सवालों के बीच जांच शुरू

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क
बांदा। शहर की घनी आबादी के बीच स्थित प्राचीन छाबी तालाब में हजारों मछलियां मर गईं। कुछ लोग इसे शरारती तत्वों की करतूत बता रहे हैं तो कुछ मछलियों के मरने की वजह तालाब का दूषित पानी बता रहे हैं। डीएम ने मत्स्य विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अधिकारियों को जांच के निर्देश दिए हैं। नगर पालिका की सात टीमों को तालाब की सफाई में करीब छह घंटे लग गए। छाबी तालाब में बड़ी संख्या में मछलियां उतरा रही थीं। सभी मछलियां मर चुकी थीं। मोहल्ले वालों की सूचना पर सिटी मजिस्ट्रेट केशवनाथ गुप्ता और सीओ सिटी राकेश कुमार और नगर पालिका ईओ बीपी यादव और इंस्पेक्टर भास्कर मिश्र ने मौके पर जाकर तालाब का निरीक्षण किया। मोहल्ले वालों से पूछताछ की। मोहल्ले के लोगों ने बताया कि लगातार दो दिन से मछलियों के मरने का सिलसिला जारी है। सोमवार को इनकी संख्या काफी कम थी, लेकिन मंगलवार को पूरे तालाब में मछलियां उतराने लगीं। शरारती तत्वों द्वारा पानी में जहर मिलाने की आशंका जताई गई। कुछ लोगों ने मछलियों के मरने की मुख्य वजह तालाब का पानी प्रदूषित होना बताया है। सिटी मजिस्ट्रेट ने बताया कि डीएम के आदेश पर तालाब के पानी की जांच कराई जा रही है। मछलियों के मरने की जांच के लिए मत्स्य विभाग और क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अधिकारियों की टीम गठित की गई है। उन्होंने बताया कि तालाब में मछली पालन नहीं होता। यहां दो तरह की सफेद व ब्लैक चाइना मछलियां पाई गईं। अभी भी कुछ मछलियां जीवित हैं। नगर पालिका सफाई कर्मियों ने घंटों मशक्कत के बाद तालाब साफ किया। मरीं मछलियों को तालाब किनारे गड्ढा खुदवाकर दफन करा दिया।




