अभिमतआलेख

“ज़िंदगीयो से खेल रहे है मुनाफ़ाखोर”

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क

ज़मीनों के सौदे देखें, प्रॉपर्टी के सौदे भी देखे पर अब ज़िंदगी के भी सौदे होने लगे है। लगता है इंसान का ज़मीर ही मर गया है। कोरोना संक्रमण के बढ़ते आंकड़ों से पूरा देश परेशान है ऐसे में कुछ मुनाफाखोर संक्रमण में इस्तेमाल की जाने वाली दवाइयों और ऑक्सीजन की ब्लैक मार्केटिंग करके पैसा बनाने में लगे हुए हैं। इंसान को ऐसी घटिया फ़ितरत पर शर्म आनी चाहिए। लोग यहाँ एक-एक साँस को तरस रहे है, मरिज़ के रिश्तेदार भटक रहे है की कहीं से दवाई और ऑक्सीजन का जुगाड़ हो जाए और आत्मजन को बचा सके, सरकार मुसीबत से जूझ रही है की हर अस्पताल में ऑक्सीजन पहुंचाया जाय। ऐसी स्थिति में कुछ लोग अमानवीय कृत्य करते दवाई और ऑक्सीजन की कालाबाजारी कर रहे है।

आक्सीजन लेबल नापने के लिए पल्स ऑक्सीमीटर मेडिकल स्टोरों पर नहीं मिल पा रहा है। यदि किसी मेडिकल स्टोर पर उपलब्ध है तो 400 रुपये में मिलने वाला पल्स ऑक्सीमीटर 1200 रुपये में मरीजों को थमाया जा रहा है। यही नहीं भाप लेने वाली मशीन भी मेडिकल स्टोरों से गायब है।

बुखार में प्रयोग लाई जाने वाली पैरासीटामाल, डोलो, एंटीबायोटिक डॉक्सी कैप्सूल और विटामिन सी की कमी पूरा करने के लिए खाई जाने वाली लिमसी मेडिकल स्टोरों पर नहीं मिल रही है। जो दवाई अस्पताल से डाॅक्टर की और से लिखकर दी जाती है वो दवा  मरीजों को पाने में मशक्कत करनी पड़ रही है। कहा जा रहा है कि दवाओं की कमी के पीछे दवा एजेंसी संचालकों का हाथ है। एजेंसी संचालक दवाओं की कालाबाजारी कर रहे हैं। अपने जान पहचान वाले मेडिकल स्टोरों को महंगे दाम में दवाओं की पूर्ति कर रहे हैं।

शर्म आनी चाहिए ऐसे मुनाफ़ाखोर लोगों को। हम टीवी पर मरिज़ों की हालत देखकर आहत हो जाते है, मरिज़ों के परिजन दवाई और ऑक्सीजन के लिए दर-दर भटक रहे है ऐसे में हमें कहीं से इतनी भी खबर मिलती है की यहाँ से दवाई ऑक्सीजन मिल सकती है, तो हम कुछ भी करके ये इन्फरमेशन अन्जाने अनदेखे लोगों तक पहुँचाने की कोशिश करते है की काश किसीकी जान बच जाए। कोई कैसे सोच भी सकता है ऐसा सौदा, कितनी गिरती जा रही है इंसानियत। इस महामारी के समय में कुछ लोगों के पास खाने तक के पैसे नहीं, इलाज भी मुश्किल से करवा रहे होते है वो कहाँ से कालाबाजारीयों की जेब भर सकते है। कैसे बचा सकते है अपने स्वजन को। ऐसे लोगों के पकड़े जाने पर कठोर सज़ा की कारवाई की जानी चाहिए।

धंधा करो ना नहीं अपने परिवार निर्वाह के लिए पर दूसरे परिवार को उज़ाड कर कि हुई कमाई आपको कभी सुख नहीं देगी। उपर वाले की लाठी में आवाज़ नहीं होती पर जब पड़ती है तो सबकुछ बहा कर ले जाती है। किसी की मदद ना कर सको ना सही पर ऐसे समय में भी लूटने की फ़ितरत इंसान को राक्षस बना रही है। दवाई, ऑक्सीजन की कालाबाजारी करने वालों को नरभक्षी राक्षस नहीं तो और क्या समझे। कहाँ से ईश्वर खुश होगा इंसानियत, अपनापन, भाईचारे की भावना दम तोड़ रही है। स्वार्थ और लालच में अंधा होते खुद को गिरा रहा है इंसान। अंदर बैठे ईश्वर का जिसे डर नहीं पैसों की चमक के आगे साँसों का सौदा कर रहा है सच में खून खौल उठता है। क्या हो गया है इंसान की सोच को कहाँ जाकर रुकेगी ऐसी ख़ुराफाती सोच।

(भावना ठाकर, बेंगुलूरु)#भावु

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