अभिमतसम्पादकीय

डॉ. अंबेडकर का दर्शन

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क

भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर का संपूर्ण जीवन भारतवर्ष के लिए प्रेरणा का स्रोत हैै। अपने कठिन संघर्ष एवं दूरदर्शिता के बदौलत वे देश के विकास में अपनी अग्रणी भूमिका निभाए । एक बेहतर समाज सुधारक बनकर भारत में व्याप्त ऊंच-नीच को सुधारने में अपने जीवन का बहुमूल्य समय लगा दिया। भारत को सामाजिक राजनैतिक एवं आर्थिक क्षेत्रों में अविस्मरणीय योगदान देकर आधुनिक भारत के निर्माता की संज्ञा पाई । आज के सामाजिक एवं राजनीतिक परिवेश में डॉ. अंबेडकर की नितांत आवश्यकता है । इनका हर वाक्य समकालीन समाज में उन्नति एवं भाईचारा का संदेश देता है । देश प्रेम की प्रेरणा, शिक्षा की महत्ता, महिलाओं की उन्नति, लोगों का बौद्धिक विकास, धर्म की प्रासंगिकता, कानून व्यवस्था एवं राजनीति का समन्वय, जीने की कला और समानता की भावना को जागृत करते हुए एक नए भारत की परिकल्पना करता है । देश प्रेम की भावना से ओत-प्रोत इनका वक्तव्य “सबसे पहले और अंत तक हम सब भारतीय हैं” आम जनमानस को देश प्रेम के प्रति सच्चे प्यार को परिलक्षित करते हुए आने वाली पीढ़ियों में भी राष्ट्र भावना को जागृत करने का कार्य करती है । महिलाओं में भी शिक्षा ग्रहण करने हेतु समान अवसर प्रदान करने के लिए इनका पहल भारतीय संविधान में अंकित हुआ । उनका सोच था कि किसी भी समाज की उन्नति को महिलाओं की उन्नति से मापना चाहिए । वर्तमान काल में आज संविधान में प्रदत्त अधिकारों के कारण महिलाओं ने अपना परचम हर क्षेत्र में लहराया है । महिलाओं में शिक्षा ग्रहण की प्रवृत्ति पुरुषों की अपेक्षा अधिक अग्रणी है। साथ ही संवैधानिक व अन्य पदों पर भी महिलाओं की सक्रिय भागीदारी है।  समाज में व्याप्त कुरीति के खिलाफ उनका संघर्ष काफी प्रशंसनीय रहा है। इनका कथन था कि, “जिंदगी लंबी नहीं बल्कि महान होनी चाहिए” युवाओं को प्रेरणा देती है, जिससे कि वे अपने जीवन में सार्थक कदम उठाएं। युवा भारत को अंबेडकर जी के दर्शन को आत्मसात करने की आवश्यकता है। मानव के अस्तित्व के लिए बुद्धि का विकास अनिवार्य हैै। बौद्धिक विकास के दम पर ही मानव अपने समृद्ध धरोहर को उसके ऊंचाई पर पहुंचाने की क्षमता रखता है। कानून और व्यवस्था के साथ राजनीति के परस्पर संबंध को डॉ. अंबेडकर ने बड़ी सहजता से समझाया । अपने अधिकारों के प्रति संघर्ष करने की प्रेरणा और सामाजिक स्वतंत्रता की बात संविधान का सदुपयोग के साथ हम सबों को प्राप्त हैै। उन्होंने समाज के पिछड़े एवं वंचित वर्गों के लोगों को न्याय,  समानता और अधिकार दिलाने के लिए अपने जीवन को देश के प्रति समर्पित कर दिया।

14 अप्रैल के इस पावन दिवस पर राष्ट्र के क्षितिज पर एक विख्यात सामाजिक कार्यकर्ता, अर्थशास्त्री, कानूनविद, राजनेता और सामाजिक सुधारक के दर्शन को देशवासियों द्वारा अनुपालन करना ही उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उनके दर्शन को अपनाकर ही एक स्वस्थ राष्ट्र की परिकल्पना संभव हो सकती है। आओ, हम सब साथ मिलकर इस अवसर विशेष पर बौद्धिक विकास एवं समानता की भावना को अपना लक्ष्य निर्धारित करते हैं।

अमरजीत कुमार “फरहाद” 

नाशिक 

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