तेरे बिन जानम कैसे रहूं मैं

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क
दिल तुझसे लगाया मैंने,
आंखों में बसाया मैंने
कह ना सकूंगी मैं
ख्वाबों में चुपके से,कैसे तू आया
इसे प्यार नहीं तो,
और क्या कहूं मैं
तेरे बिन जानम
कैसे रहूं मैं
मेरे दिल के धड़कनों में
अब तेरा ही नाम लिखा है
मेरी आती-जाती सांसो में
हरदम तू ही तू दीखा है
ये कहना लगता दुश्वार मुझे
ये क्या हो गया है
जब से मिले हो जानम
मर्ज इश्क का और बढ़ गया है
ना करना तुम मुझसे वेवफाई
मेरे मर्ज की तुम ही हो दवाई
तेरी जुदाई को सह ना सकूं मैं
तेरे बिन जानम
कैसे रहूं मैं…..
दिल तुझसे लगाया मैंने….
मुश्किल से तुम मुझको मिली हो
अंधेरों के बीच रोशनी दीखी है
बिन देखे तुझको चैन आता नहीं
तेरे सिवाय सनम मुझको
और कुछ भाता नहीं
तन्हा रहना अब मुमकिन नहीं
और क्या कहूं मैं
तेरे बिन सनम
अब कैसे रहूं मैं
दिल तुझसे लगाया मैंने,
आंखो में बसाया मैंने
कह ना सकूंगी मैं
ख्वाबों में चुपके से,कैसे तू आया
इसे प्यार नहीं तो
और क्या कहूं मैं
तैरे बिन जानम,
कैसे रहूं मैं…….
…………………………………….
सम्पर्क सूत्र…..
राजेंद्र कुमार सिंह
लिली आरकेड,फलैट नं-101
इंद्रानगर,वडाला पाथरडीह रोड
मेट्रो जोन,नाशिक-09,ईमेल:
rajendrakumarsingh4@gmail.com




