कला-साहित्यविचार
पिता मरते नही

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क
अंग देश के पावन धरती
पिता कभी मरा नही करते,
वो रह जाते हैं हमारे हृदय में,
उम्मीदों में,हमारे संस्कारो में।
जब जब हौसले
दुनिया तोड़ती हैं
तब तब पिता उम्मीद बन
मन को सजा जाते है।
जब जेब मे जिमेदारिया
बहुत हो और बच्चे खिलौने की
ज़िद करे तब तब पिता
आँखों मे तैर जाते है।
जब कोई अपना
उपेक्षित करता है
तब पिता मन
मस्तिष्क में छा जाते है।
त्योहार में बाजार की रौनक
पिता की खूब याद दिलाती हैं,
जिनकी जेब से हम दुनिया
खरीद लेते हैं आज वही
दुनिया हमे बड़ी महंगी
नज़र आती हैं।
आँगन का पेड़
जितना बूढा होता हैं
उतना ही पिता गहरे से
याद आते हैं।
पिता कभी मरा नही करते
वो रह जाते हैं हमारे
हृदय की तलहटी मे।
डिम्पल राकेश तिवारी,वरिष्ठ कवयित्री
अवध यूनिवर्सिटी चौराहा-अयोध्या,उ0प्र0




