कला-साहित्यविचार
बीते हुए कल

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क
अरे!बीते हुए कल
बेफिक्र होकर मत घूम।
तुमसे अपने हर दर्द का
हिसाब लूंगा ।
अरे!बीते हुए कल
बेफिक्र होकर मत हंस
तुमसे अपने हर आंसू का
हिसाब लूंगा।
अरे!बीते हुए कल
बेफिक्र होकर मत सो
तुमसे अपनी हर नींद का
हिसाब लूंगा।
अरे!बीते हुए कल
बेफिक्र होकर अपनी
झूठी शान पर मत इतरा,
तुमसे अपने हर अपमान का
हिसाब लूंगा।
अमित डोगरा,
कांगड़ा,हिमाचल प्रदेश
9878266885
amitdogra1@gmail.com




