कला-साहित्य

भूल गए

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क

भूल गए हम क ख ग घ,
भूल गए हम गिनती।
मैडम जी आकर याद दिलाओ,
आज करें हम विनती।

गुम हो गईं कॉपी किताबें,
गुम हो गया बस्ता।
घर से स्कूल जाने का,
भूल गए हम रस्ता।
मैडम जी हमें बुलाने आओ,
आज करें हम विनती।
भूल गए………

ड्रेस हमारी फट गई है,
मिलें ना जूते मोजे।
खेल कूद के सिवा नहीं हैं,
काम कोई भी दूजे।
मैडम जी हमें समझाने आओ,
आज करें हम विनती।
भूल गए………

मम्मी पापा मारें पीटें ,
और हमसे काम करावें।
बात उनकी ना माने तो,
डांट हमारी लगावें।
मैडम जी हमें बचाने आओ,
आज करें हम विनती।
भूल गए………

पढ़ना लिखना भूल गए हम,
भूल गए सब पाठ।
पहाड़े सारे भूल गए हम,
अब कुछ भी नहीं है याद।
मैडम जी हमें पढ़ाने आओ,
आज करें हम विनती।
भूल गए………

याद आपकी आती है,
सुन लो प्यारी मैडम।
भूल गईं क्या हम सबको ,
बोलो प्यारी मैडम?
मैडम जी हमको गले लगाओ,
आज करें हम विनती।
भूल गए………

स्वरचित
सपना (सo अo)
जनपद-औरैया

 

 

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