ये कैसा मंजर

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क
ये कैसा मंजर भारत में जिसमे फँसा पूरा समाज।
बचने का न राह दिख रहा बेबस खड़ा पूरा समाज।।
मौन पड़े सब चौंक चौराहे केवल हलचल श्मशान में।
संकट में केवल जीवन है आश बंधी भगवान में।।
मौन पड़े सुर कोयल के मौन पपीहे की बोल है।
एम्बुलेंस का कर्कश स्वर गूंज रहा चहु ओर है।।
चारो तरफ बस एक ही बोली कॅरोना का करुण चीत्कार।
कभी समाज तो कभी स्वजन को आगोश कॅरोना का चीत्कार।।
शिवशम्भु की धरती पर ये कैसा फैला मातम ।
जाने कौन से अनजान गलती का जनमानस झेल रहा मातम।।
नजर लगी कैसी मनहूसियत जिससे उबरने का न मिल रहा डगर।
एक एक कर जनसमुदाय को खींच रहा है मौत डगर।।
मातम ये कितना गहरा है जो फैला है चारो ओर।
नजर गड़ी अब आंकड़ों पर राह बचा न कुछ और।।
आश टिकी है सरकार से और विश्वास बंधा है परासत्ता के साथ।
इस मुसीबत के काले छाया का हरण करेंगे प्रभुजी आप।।।
श्री कमलेश झा
नगरपारा भागालपुर




