कला-साहित्य

ये हाथ कलम चलाए जाएं

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क

कैसी लगन लगी है मुझे यार
जो मुझको जलाए जाए
पता नहीं आते ये शब्द कहाँ से
कि हाथ कलम चलाए जाएं
पता नहीं…….…..

जो भी आता है, मेरे मन में
वो रुक ना पाता है, मेरे जहन में
पता नहीं, कैसे वो,बनकर मोती
खाली पन्नों पे बिखर जाएं
पता नहीं…………

ये सच डरता नहीं,अब दुनियाँ से
ना ही डरता है अब ये, ताहनों से
पता नहीं कैसे कर के पक्का इरादा
बस मेरी कलम पर चढ़ा आए
पता नहीं…………

कभी डरती हूँ मैं दुनियाँ से
कि कोई भला बुरा ना मुझे कह जाए
पर ये रुकने ना देते मेरे जज्बात
बस पन्नों पर चढ़ मुस्कुराएं
पता नहीं…………

अब, मैं तो गई हूँ हार
अब ये, मानें ना ,मेरा कहा यार
मेरे हिर्दय के सब धागों से
ये रचना बनाए जाएं
पता नहीं……….।

करमजीत कौर,शहर-मलोट
जिला-श्री मुक्तसर साहिब,पंजाब

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