कला-साहित्यविचार
रास्ता ढूँढ़ लो

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क
अरे !मुसाफिर ,
जरा़ देख चलो।
कब क्या होगा ,
रास्ता ढूँढ़ लो।
महफि़ल सजी नहीं हैं,
खुद को सजाना होगा।
मंजिल चाहे कठिन हो ,
रास्ता ढूँढ़ लो।
चींटी रानी से सीखो,
हौसला बुलंद करना।
हार मत मानो,
रास्ता ढूँढ़ लो।
सूर्य को देखो ,
समय पे ध्यान लगाना।
जागो उठो न सो जाओ,
रास्ता ढूंढ लो।
वक्त के साथ चलो,
मंजिल यूँ ही मिलती हैं।
तुम निराश क्यों हो,
रास्ता ढूँढ़ लो ।।
स्वरचित रचना
लेखक डोमन निषाद डेविल
डूंडा बेमेतरा छत्तीसगढ़




