
युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क
“कोरोना”- काली दुनिया का काला सच बन गया है। पीड़ित मानवता के सिद्धांतों के अनुकूल दुनिया भर में मानव जीवन को बचाने के लिए संपूर्ण दुनिया में मनाया जाने वाला विश्व रेडक्रास दिवस इस समय सहायता का प्रतीक है। इस वर्ष विश्व रेडक्रास दिवस का थीम “मानवता” होना चाहिए जो नर्सों को समर्पित होना चाहिए जो कि अपने जीवन मृत्यु की चिंता किए बिना हर समय मानवता की सेवा दिन रात कर रही हैं। नर्स यानी सेविका ही सामाजिक परिवर्तन की दाई होती है । इस दिवस की महत्ता युद्ध , प्राकृतिक आपदा , गंभीर बीमारियों से जूझते संपूर्ण विश्व को सहायता प्रदान करने के लिए होती है।विश्व रेडक्रास संस्था सफेद रंग के कपड़ों पर लाल पट्टियों धारित, धरित्री के धैर्य को धारण करते हुए निष्पक्षता तटस्थता के साथ मानवता की मदद करती रहती है। आज घोर अनिश्चितता की स्थिति में प्रत्येक मनुष्य मृत्यु के भय से त्रस्त है ऐसे समय में जीवन रक्षा की कामना करना “ज्यामिति की स्वयं सिद्धि” की तरह है कि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन को स्वयं बचाए। ऐसे समय में पीड़ित मानवता के लिए रेड क्रॉस संस्था की महत्ता महत्वपूर्ण हो जाती है। विश्व रेडक्रास दिवस उस दूरदर्शिता की उपज का परिणाम है जिसकी संकल्पना 150 वर्ष पूर्व हेनरी डुनेट ने किया था। रेडक्रास दिवस पीड़ित मानवता की प्राकृतिक धारणाओं का मूल बीज है जिसका अंकुरण शनैः शनैः संपूर्ण विश्व में दिखाई पड़ रहा है। रेडक्रास दिवस मनाए जाने का चिंतन युग को नई दिशा देने का संकल्प होना चाहिए जिससे संपूर्ण विश्व व्यवस्था में सकारात्मक परिवर्तन देखा जा सके। आज महामारी से पीड़ित संपूर्ण मानवता के ऊपर कई प्रश्न चिन्ह ? हैं। आधुनिक जगत के अध्ययन में नये विज्ञान की नई विधियों का भी उदय हुआ है। लेकिन महामारी से निपटने के द्वार का ताला खोलने की कुंजी अभी तक किसी भी देश को नहीं मिली है। संपूर्ण विश्व में इतनी उथल पुथल मची हुई है ऐसे समय में रेड क्रॉस संस्था ही विश्व के लिए शुभ संकेत है। महामारी से पीड़ित मानवता के लिए अमृत का पनघट कौन ढूंढेगा, कौन पिलायेगा पीड़ित मानवता को अमृत का घूँट, लेकिन इस घूँट की रिक्ति कोष रेड क्रॉस संस्था मानवता की सेवा करके ही पूर्ण कर रही है। पीड़ित मानवता का आग्नेय प्रतिवेष चारों ओर चल रहा है। एक दूसरे की मिलन की उस्मा घरों में कैद हो गई है। अंबर में विमान प्रज्ज्वलित बादलों की श्रृंखला में कैद हो गए हैं जिसके कारण पीड़ित मानवता की सेवा रेड क्रॉस संस्था के लिए कठिनाई का कारण प्रतीत हो रही है। कोरोना जन्मदाता के इस घिनौने कृतियों की माफी चीन किससे मांगेगा।क्या रेड क्रॉस संस्था से, या मानवता से, या फिर संयुक्त राष्ट्र संघ से।
मौलिक रचना
सत्य प्रकाश सिंह




