सूर्य सम

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क
जीवन पथ पर खुशियाँ चाहो,
तो तप चलना होगा।
रश्मि रथी सी किरणें लेकर,
हमें विचरना होगा।
जाने कितने युग बीते रवि,
प्राची से आता है।
झोली में आशा की किरणें,
खूब लुटा जाता है।
देव-देव कहते देवों सा,
बनकर रहना होगा।
यदि चाहो सम्मान देव सा,
मन को करना होगा।
रश्मि रथी सी किरणें लेकर,
हमें विचरना होगा।
रवि के आने पर देखो यह,
अचला भी मुस्काती।
देख लालिमा पूरब में वह,
विहग टोलियाँ गाती।
चरण लोक कल्याण मार्ग पर,
हमको धरना होगा।
रश्मि रथी सी किरणें लेकर,
हमें विचरना होगा।
कलियाँ पुष्प विहँस खिल जाते,
उसके आ जाने से।
खिलें धान की बाली उसके,
नभ में मुस्काने से।
मन में रख समभाव हमें फिर,
रोज़ सँभलना होगा।
रशिम रथी सी किरणें लेकर,
हमें विचरना होगा।
नवग्रह सारे मिल सूरज की,
परिक्रमा लगाते हैं।
देते हैं सम भाव सभी वे,
गिरते न गिराते हैं।
आदर प्रेम समर्पण पथ पर,
सबको चलना होगा।
रश्मि रथी सी किरणें लेकर,
हमें विचरना होगा।
वीनू शर्मा,वरिष्ठ साहित्यकार
जयपुर-राजस्थान,+91 94139 40755




