कला-साहित्य
॥ सावन ॥

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क
सावन बरसे रिमझिम रिमझिम
फिर भी चमन है उदास
कैसी बुन्दे बरसाया रे बदली
तन मन की ना बुझी प्यास
सावन बरसे रिमझिम रिमझिम
बैरन ऑखिया है उदास
पपिहरा विरहा की गीत सुनाये
तन मन में लगी आग
सावन बरसे रिमझिम रिमझिम
नदिया बह रही बिन्दास
पूरवईया सलुगाये प्यार की अगन को
मन की कौन बुझाये प्यास
सावन बरसे रिमझिम रिमझिम
दिल को तड़पाये दिन रात
कोई बताये मेरे हमदम को
अकेले ना कटती ये काली रात
सावन बरसे रिमझिम रिमझिम
प्रिये आ जा बाँहों में आज
जुल्फों में छुपा लो अब तुम मुझको
कर दो प्रेम की बरसात।
उदय किशोर साह
मो० पो०जयपुर जिला बाँका बिहार
9546115088




