युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क
तेरे आंचल कि छांव में मां
एक नवजात कली खिलती
आंचल कि छांव में ही कली
महक लाडो से फूल बनती।।
बुरी नज़र से बचा मां आंचल
में सहेज़ के चलती
बनी जो कली एक दिन फूल
वो इस दुनिया से मिलती।।
पड़ी एक दिन फूल पर बुरी
नज़र इस ज़माने की
कली से बनी थी फूल जो वो
टुकड़ों में टूट बिखरती।।
टूट जाती उस फूल संग मां भी
जो आंचल थी सहेज़ के चलती।।
वीना आडवानी तन्वी
नागपुर, महाराष्ट्र