युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क
संघर्ष कि आग में तपकर
लोहे तरह लाल होकर
ज़ब ज़ब अकेला चलेगा
और भी मजबूत बनेगा
ना सोच कभी कोई न साथ
तू खुद के लिए हे बस खास
दुःख का अगर हो अहसास
तो चैन कि लेना तुम सांस
इसके उसके पास न जाना
मदद कि भिक न मांगना
हर कोई तुझे ही समजायेगा
पर साथ देना कोई आयेगा
कछुवे कि गती से तू चल
पर उन सबसे आगे निकल
गिर जा तो खुद को संभल
दिल में न मचा हलचल
उस ईश्वर के सिवा न कोई तेरा
घूम फिर कर आता कर्म का फेरा
तेरा निर्णय तेरा नसीब बदलेगा
तकदीर अपनी तू खुद लिखेगा
कु, कविता चव्हाण, जलगांव, महाराष्ट्र