युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। यूपी विधानसभा चुनाव 2022 के मद्देनजर जहां एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूर्वांचल को लगातार विकास योजनाओं के तोहफे दे रहे हैं। वहीं कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी भी पूर्वांचल पर फोकस की हुई हैं, लेकिन इन सब के बीच सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के नेता ओमप्रकाश राजभर छोटे दलों का समूह भागीदारी संकल्प मोर्चा के माध्यम से दबाव की राजनीति कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने समाजवादी पार्टी से गठबंधन किया है।अब मऊ रैली के माध्यम से बड़े दलों की गणित बिगाड़ने की जुगत में हैं। उत्तर प्रदेश की कुल 403 सीटों में से लगभग 160 विधानसभा सीटें पूर्वांचल में आती है, जो करीब 33 फीसदी होती हैं।पूर्वांचल के इलाके में करीब 28 जिले आते हैं, जो सूबे की राजनीतिक दशा और दिशा तय करते हैं।इनमें वाराणसी, जौनपुर, भदोही, मिर्जापुर, सोनभद्र, प्रयागराज, गोरखपुर, कुशीनगर, देवरिया, महाराजगंज, संतकबीरनगर, बस्ती, आजमगढ़, मऊ, गाजीपुर, बलिया, सिद्धार्थनगर, चंदौली, अयोध्या, श्रावस्ती, बहराइच, सुल्तानपुर, अंबेडकरनगर, गोंडा, बलरामपुर, अमेठी, प्रतापगढ़, कौशांबी, जिले शामिल हैं। 2017 के चुनाव में पूर्वांचल में बीजेपी ने 115 सीट पर कब्जा जमाया था जबकि सपा ने 17, बसपा ने 14, कांग्रेस को 2 और अन्य को 16 सीटें मिली थीं।समाजवादी पार्टी ने 2012 और बसपा ने 2007 में पूर्वांचल में बढ़िया प्रदर्शन किया था। 2017 सहित चुनावी परिणामों ने ये साबित किया कि पूर्वांचल का मतदाता कभी किसी एक पार्टी के साथ नहीं रहा। ओम प्रकाश राजभर की सियासी ताकत उनका राजभर समाज है, जो पूर्वांचल के कई जिलों में राजनीतिक समीकरण बनाता बिगाड़ता है।यूपी में राजभर लगभग 3 फीसदी हैं, लेकिन पूर्वांचल के जिलों में लगभग 15 से 20 फीसदी हैं। ओमप्रकाश राजभर ने 2012 के चुनाव में 52 सीटों पर प्रत्याशी उतारा था लेकिन एक भी सीट पर भी जीत नहीं मिली थी। पूर्वांचल में वोट फीसदी लगभग 5 परसेंट जरुर हो गया था। 13 सीटों पर पार्टी को 10 हजार से लेकर 48 हजार तक वोट मिले थे। इसके अलावा बाकी सीटों पर 5 हजार से ज्यादा वोट हासिल हुए थे। गाजीपुर, बलिया और वाराणसी की कुछ सीटों पर तो बीजेपी से भी ज्यादा वोट मिले थे. सुभासपा महासचिव अरुण राजभर कहते हैं कि उनका प्रदर्शन बेहतरीन होगा। ओवैसी, शिवपाल, भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर जैसे क्या और लोग भी मऊ रैली में शामिल होंगे के सवाल पर राजभर कहते हैं कि जो लोग अभी तक भागीदारी संकल्प मोर्चा में शामिल हैं, वहीं लोग मंच शेयर करेंगे। इन नेताओं की पार्टियां अभी मोर्चा का हिस्सा नहीं हैं।