युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क
प्यार के मंदिर में देखो घंटियां हैं बज रही
चढ़ गया इश्क खुमार घंटियां हैं बज रही।
मौसम हुआ सुहाना प्रकृति भी सज रही
दिल में देखो वह तो प्यार को भर रही।
रंग बिरंगी कलियां देखो फूल बन खिल रही
मिल रहा प्रकृति प्यार नवयौवना सी लग रही।
उन्मुक्त पवन देखो आज यूं कह रही
भर लो मुझे बाँहों में पगली सी लग रही।
सिंगार कर जब वह चली बचे ना कोई भी यहांँ
मानो रति पति से सारी धरती मोह रही।
रचनाकार ✍️
मधु अरोरा
