कला-साहित्यविचार
भारतीय नववर्ष

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क
लद गई फूलों की डाली,
बिषय है अति हर्ष का।
वासंतिक नवरात्र संग,
स्वागत भारतीय नववर्ष का।।
मदमस्त हो बगराज के हर मंजरी से मकरन्द झरता।
कूंच से महुआ के अब,
सरस रस टप-टप टपकता।।
पिय कहां की रट लगाए,
गुंजित कोकिला का मधुर स्वर।
स्वर में स्वर बच्चे मिलाते,
डालकर पैनी नजर।।
धन-धान्य का भण्डारण हुआ ,
यह सुखद निष्कर्ष है,
मेहनत लगन संघर्ष का–
स्वागत भारतीय नववर्ष का।—–
रसाल की सोंधी सुगन्ध।
बह रहा शीतल पवन मंद।।
शक्ति के उपासना का महापर्व।
पहिचान है हमारी सांस्कृतिक आदर्श का,
स्वागत भारतीय नववर्ष का।
गौरीशंकर पाण्डेय सरस




