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आओ बेजुबान पशु पक्षियों के प्रति मैत्री, करुणा, रक्षा, मदद का भाव अपनाएं

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क

मुख जानवरों को क्रूरता से बचाना, ईश्वर अल्लाह की अनमोल आराधना है 

बेजुबान पशु पक्षियों से मैत्री कर उनका कल्याण करना, सबसे बड़ा मानवता धर्म – एडवोकेट किशन भावनानी गोंदिया

गोंदिया – भारतीय संवेदनशीलता सदियों से जग प्रसिद्ध है। यह गुण भारत माता की मिट्टी में ही समाया हुआ है यह संवेदनशीलता का भाव केवल मानव जाति तक ही सीमित नहीं है अपितु भारतीय संवेदनशीलता बेजुबान पशु पक्षियों जानवरों के प्रति भी कूट-कूट कर भरी है। क्योंकि भारत आदि अनादि काल से ही एक आध्यात्मिकता पूर्ण देश है जिनके स्वभाव में ही मैत्रीपूर्ण व्यवहार, दया, करुणा भरी है।

साथियों धर्म मानवता का विस्तार करता है, मनुष्य ही नहीं पशु-पक्षी भी उसकी करुणा में आश्रय पाते हैं। भारतीय संस्कृति में पशु पक्षियों के प्रति प्रेम, सह-अस्तित्व और वहां तक कि उनकी पूजा की भी परंपरा रही है। भारतीय धर्मशास्त्रों के अनुसार जीवों की उत्पत्ति जल से हुई है।वृहदारण्यक उपनिषद में कहा गया है कि सबसे पहले जल में सूक्ष्म जीव की उत्पत्ति हुई, उससे दूसरा जीव बना और उनके संयोग से धीरे-धीरे चींटी, बकरी, वराह आदि जीवों का विकास हुआ।

साथियों बात अगर हम वर्तमान समय में बेजुबान पशु पक्षियों जानवरों की करें तो वर्तमान बदलते परिवेश,जलवायु परिवर्तन की भयंकर त्रासदी,बढ़ते शहरीकरण बदलते पर्यावरण परिवेश, जंगलों की कटाई इत्यादि अनेक कारणों से बेजुबान पशु पक्षियों, जानवरों के लिए भीषण समस्या खड़ी हो गई है। साथियों कई प्रजातियां विलुप्त हो चुकी है तो कई प्रजातियां विलुप्तता  के कागार पर खड़ी है। साथियों अब समय आ गया है कि हम अपने पूर्ण संवेदनशीलता का उपयोग करें।

साथियों मानव जाति तो हम फिर भी बोलचाल कर अपनी समस्या या जीवनपथ की कठिनाइयां सुलझा सकते हैं, परंतु इन बेजुबान जीवो की सुरक्षा व रक्षा करने का समय अब आ गया है। साथियों प्राकृतिक विपत्तियों, पिछले साल से कोरोना महामारी भयंकर त्रासदी, के कारण विपरीत प्रभाव मूक प्राणियों के ऊपर भी पड़ा है जिसका हमें तात्कालिक संज्ञान लेकर इन मुक्त जानवरों के प्रति मैत्री भाव रखना ज़रूरी हो गया है, क्योंकि हम भारतीय हैं और बेजुबान पशु पक्षियों, जानवरों के प्रति मैत्री, भाव, करुणा, रक्षा, मदद का भाव रखना उन्हें क्रूरता से बचाना, ईश्वर अल्लाह की अनमोल आराधना है।

साथियों बात अगर हम पशु पक्षियों, जानवरों को क्रूरता से बचाने की करें तो भारत में इसके लिए केंद्र व राज्यों में अनेक कानून बने हैं जिनमें भारतीय वन्य जीव संरक्षण (संशोधित) अधिनियम 2002 तथा भारतीय संविधान में जानवरों की सुरक्षा के लिए आर्टिकल अत्यंत महत्वपूर्ण है। साथियों बात अगर हम पशु कल्याण की करें तो, पशु क्रूरता रोकने के लिए कानून को सख्त करना पड़ेगा। कठोर प्रावधान सिर्फ कागजों में ही सीमित न हों, बल्कि सख्ती से लागू भी होने चाहिए और दण्ड राशि में बढ़ोतरी होनी चाहिए।

पशुपालको को प्रोत्साहन राशि देनी चाहिए, पशु बीमा योजना को बढ़ावा देना होगा। पशु चिकित्सालयों की संख्या बढ़ा देनी चाहिए और उनमें पड़े रिक्त पदों की पूर्ति होनी चाहिए,उनमें आधुनिक सुविधाओं के साथ मुफ्त दवाइयां उपलब्ध होनी चाहिए। सरकार को गौशालाओं की तर्ज पर अन्य पशुओं के लिए भी पशुशालाएं खुलवा देनी चाहिए। पशुधन बढ़ाने के लिए सस्ती दरों पर लोन उपलब्ध कराने से लोगों का पशुपालन के प्रति रुझान होगा एवं उनका मनोबल बढ़ेगा। इससे पशुओं के प्रति क्रूरता कम होने के साथ रोजगार भी बढ़ेगा।साथियों बात अगर हम पशुओं पर क्रूरता रोकने की करें तो,पशुओं पर क्रूरता को रोकने के लिए संबंधित कानूनों का सख्ती से पालन कराएं।

विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाएं स्थानीय प्रशासन से सामंजस्य स्थापित कर आवारा पशुओं के लिए आवास, भोजन, जल, चिकित्सा जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराएं। चारागाह को संरक्षण दिया जाए। पशु हिंसा को रोकने के लिए सख्त कानून बनाने होंगे। पशुओं के साथ क्रूरता की घटनाएं बहुत ज्यादा हो रही हैं। सड़क पर रहने वाले जानवरों से लेकर पालतू पशुओं तक को क्रूरता झेलनी पड़ती है। दूध निकालकर गायों को भी यूं ही छोड़ दिया जाता है। भूखी-प्यासी गाएं कचरे में मुंह मारती नजर आती हैं। कुत्ते बहुत ज्यादा क्ररता झेलते हैं। पाड़े, घोड़े, खच्चर, ऊंट, बैल, गधे जैसे जानवरों का इस्तेमाल माल की ढुलाई के लिए किया जाता है।

इस दौरान उनके साथ बहुत ज्यादा क्रूरता होती है। पशुओं की तकलीफों को लेकर बिलकुल भी जागरूकता नहीं है। अभी हाल ही में मार्च में केरल के मल्लपुरम में गर्भवती हथिनी के साथ हुई निर्मम हिंसा को भारतीय नागरिक अभी तक भूले नहीं हैं। पशुओं के प्रति क्रूरता रोकने के लिए शासन प्रशासन सख्त होना चाहिए जेल भी हो और साथ-साथ भारी जुर्माना भी हो, ताकि लोगों में डर पैदा हो। मीडिया पशु-पक्षियों के संरक्षण के लिए काम करने वाले लोगों के बारे में ज्यादा से ज्यादा बताए। पशु कल्याण अधिकारी के नाम, फोन नंबर का प्रचार किया जाए।

पशु-पक्षियों के संरक्षण के लिए काम करने वाले सभी सरकारी विभागों और संस्थाओं के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी दी जाए, ताकि लोगों में जागरूकता पैदा हो। अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि बेजुबान पशु पक्षियों के प्रति मैत्री, करुणा, रक्षा, मदद का भाव रखना उन्हें क्रूरता से बचाना ईश्वर अल्लाह की अनमोल आराधना के तुल्य है तथा बेजुबान पक्षी पशुओं, जानवरों से मैत्री कर उनका कल्याण करना सबसे बड़ा मानवता धर्म है।

संकलनकर्ता लेखक –  कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

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