कला-साहित्यविचार

इसलिए खैरियत पूछ ले

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क

एक दिन सूचना मिली वरिष्ठ पत्रकार श्री प्रमोद श्रीवास्तव नहीं रहे, फिर सूचना मिली कि राष्ट्रीय क्षितिज पर अपनी विशिष्ट पहचान रखने वाले हिन्दुस्तान, नई दुनियां में सम्पादक रहे श्री राजीव मित्तल भी नहीं रहे। फिर सूचना मिली कि लखनऊ को जीने वाले जाने माने  इतिहासकार श्री योगेश प्रवीण भी नहीं रहे।

तीनों सूचनाओं में एक सूचना आम रही कि इन लोगों को हर सम्भव कोशिश के बाद भी आवश्यक चिकित्सा सुविधा नहीं मिली। अफसोस।

ईश्वर श्री प्रमोद श्रीवास्तव, श्री राजीव मित्तल और श्री योगेश प्रवीण जी की आत्मा को शांति दे। इनके परिजनों और चाहने वालों को यह दुख सहने की शक्ति दे।

इसी भावना को अर्पित है,

खैरियत भी पूछ लो

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छूट सकता है यह साथ भी

इसलिए खैरियत पूछ ले।

ज़िन्दगी हो चली मृत्यु सी

इसलिए खैरियत पूछ ले।

यह हृदयहीन युग यह बला

आपसी सूत्र टूटे हुए,

और है तन्त्र भी निर्दयी

इसलिए खैरियत पूछ ले।

छोड़कर व्यस्तताएं सभी

जोड़ फिर तार बिखरे हुए,

क्या पता सुर छिपा हो कहीं

इसलिए खैरियत पूछ ले।

है पता तूँ बहुत व्यस्त है

हो लिए पांव पर आसमां,

पर पता कल का कुछ भी नहीं इसलिए खैरियत पूछ ले।

आज पानी तेरे पास है

देखकर यह बहुत खुश न हो,

जल्द सूखेगी यह भी नदी

इसलिए खैरियत पूछ ले।

ना दवाई कहीं ना हवा

सिर्फ नफरत का भंडार है,

है व्यवस्था खुदी नकचढ़ी

इसलिए खैरियत पूछ ले।

आज औरों के संग जो हुआ

देखकर जिसको तूँ है दुखी,

कल तेरे साथ होगा यही

इसलिए खैरियत पूछ ले।

धीरेन्द्र नाथ श्रीवास्तव

सम्पादक

राष्ट्रपुरुष चन्द्रशेखर सन्सद में दो टूक

लोकबन्धु राजनारायण विचार पथ एक

अभी उम्मीद ज़िन्दा है

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