कला-साहित्य

“ऑनलाइन शोपिंग हाय तौबा”

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क

इंसान की ज़िंदगी मशीन सी बन गई है जिसका फ़ायदा उठाते ऑनलाइन व्यापारियों की लाटरी लगी है। आज के ज़माने में दौड़ती भागती ज़िंदगी से थके हारे लोग ऑनलाइन शोपिंग की सुविधा के चलते बाज़ार जाने से कतराने लगे है। घर बैठे हर चीज़ हाज़िर हो जाए तो कौन चार कदम चलकर आसपास की छोटी शोप तक जाने की तस्दी लेगा। 

पर इस ऑनलाइन शोपिंग ने छोटे व्यापारियों का जीना मुहाल कर दिया है। 

आजकल देश के बहुत सारे मुद्दों में एक ये मुद्दा भी गंभीर है। आजकल जो ऑनलाइन शोपिंग का ट्रेंड चल रहा है उससे छोटे व्यापारियों की हालत खस्ता होती जा रही है यह है। 

आज ज़्यादातर लोग घर बैठे चीज़ें मंगवा लेते है सब्ज़ी, दूध और ग्रोसरी से लेकर जूते, कपड़े मोबाइल और इलेक्ट्रानिक आइटम सबकुछ ऑनलाइन आ जाता है। ऑनलाइन शोपिंग की कितनी सारी एप्स ने धमाल मचा रखी है। कोई आसपास की शोप तक जाने की तस्दी नहीं लेता, जिससे छोटे व्यापारियों के धंधे में बड़ी खोट आई है। 

और लोगों को सबसे बड़ी सुविधा ऑनलाइन से ये मिलती है की चीज खराब या टूटी-फूटी निकली या पसंद नहीं आई तो रिटर्न और पैसे भी वापस मिल जाते है। छोटे व्यापारियों को इन ऑनलाइन शोपिंग ने तोड़ कर रख दिया है।

कुछ सब्ज़ी के ठेले वाले और छोटी किराने की दुकान वालों का कहना है की जब ऑनलाइन का ज़माना नहीं था तब अच्छी खासी बिक्री हो जाती थी। पर अब तो लोग ठेले तक आने से कतराते है। पहले तो बड़े-बड़े घराने की औरतें आसपास ठेले से सब्ज़ी खरीदती थी तो ज़ाहिर सी बात है एक बार में  400/500 रुपये की खरीदारी करते निकल जाती थी। अब तो एकल-दुकूल 100/200 ग्राम सब्ज़ी खरीदने वाले जिनका ऑनलाइन शोपिंग से कोई लेना देना नहीं वही आते है। सच में छोटे व्यापारियों का बेड़ा गर्द कर दिया है ऑनलाइन शोपिंग ने।

त्योहारों के सीजन में बाजार कुछ तेजी पकड़ता है, लेकिन सबसे ज्यादा तेजी ऑनलाइन बाजार में ही दिखाई पड़ती  है। ऑनलाइन कंपनियां अब लगभग एकाधिकार की ओर बढ़ती दिख रही हैं, कोरोना काल के इसी मंदी के सीजन में छोटे व्यापारियों को ग्राहकों का इंतजार रहता है। छोटे व्यापारियों का कहना है कि अगर सरकार ने ऑनलाइन व्यापार में चल रही अवैध व्यापारिक गतिविधियों पर अंकुश नहीं लगाया तो इससे देश के 12 करोड़ खुदरा व्यापार को बहुत बड़ा झटका लग सकता है और करोड़ों व्यापारी तबाह हो सकते हैं। इससे करोड़ों लोगों की रोजी-रोटी पर सीधा असर पड़ने की संभावना है।

कैट जैसे व्यापारिक संगठनों का दावा है कि उसके साथ आठ करोड़ से ज्यादा छोटे विक्रेता जुड़े हैं। जबकि पूरे देश में छोटे व्यापार में लगभग 12 करोड़ व्यापारी काम कर रहे हैं। यदि एक दुकान पर एक व्यापारी के साथ एक भी सहायक होने का औसत पर देखें तो इस प्रकार लगभग 24-25 करोड़ लोगों को छोटा व्यापार क्षेत्र नौकरी देता है।

ऑनलाइन कंपनियों पर सबसे बड़ा आरोप यही है कि वे रोजगार छीन रही है। 

छोटे व्यापारियों का कहना है कि वे अमेजन या फ्लिपकार्ट से मुकाबला करने में नहीं घबराते। सबसे बड़ी समस्या ऑनलाइन कंपनियों द्वारा वस्तुओं की खरीदी पर दी जा रही अतार्किक छूट है।

नई ई-कॉमर्स में अतार्किक तरीके का उपयोग कर अवैध तरीके से ग्राहकों को प्रभावित करने से रोकने पर कानून बनाया गया है। इससे देश के 12 करोड़ छोटे व्यापारी और 25 करोड़ से ज्यादा लोगों के रोजगार की रक्षा हो सकेगी।

लोगों से अपील है की अपने आसपास के नज़दीकि छोटे व्यापारियों से सामान खरीद कर उनकी समस्याओं को कुछ कम कर दें। ऑनलाइन शोपिंग के चक्कर मे कई परिवारों के निर्वहन पर असर पड़ रहा है। खासकर इस महामारी के समय में आर्थिक व्यवस्था डावाँडोल हो गई है तब छोटे लोगों से सामान खरीदकर उनकी मदद करें।

भावना ठाकर ‘भावु’ (बेंगलूरु,कर्नाटक)

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