कला-साहित्य

खेल ना बाटे

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क

उबरल भात पितरन के जइसन, लोग ब्राह्मण  के देखत बाटे।

आपन काम बनावे खातिर, चारा चुन चुन फेकत बाटे।।

हार जीत के चक्कर में, लोगवा चकती चलाय रहल बा। राजनीति क नया ककहरा, मतलब में सब पढवाय रहल  बा।।

सयय क सांचो फेर ई बाटे।

मांटी के दिया में तेल ना बाटे।।अब बुद्धि चकराय रहल बा,

पहिले जइसन‌ खेल ना बाटे।

गौरीशंकर पाण्डेय सरस

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button