कला-साहित्यविचार

तुम दुआ करो दिल से

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क

तुम दुआ करो दिल से–2

मेरा रूठा यार मिल जाए

मेरा खोया प्यार मिल जाए

बिछड़े हुए हम अर्से से

बस मिल जाए मुझसे

तुम दुआ करो दिल से–2

वह कैसा सुहाना दिन था

वाकई लाजवाब बेहतरीन था

लबरेज रहे मौसम बहारों से

महफिल भरी रहती यारों से

इक बार फिर लौटता वो दिन

था खूबसूरत,कितना हसीन

चेहरा फूल सा खिल जाए

तुम दुआ करो दिल से–2

गुजरते राहों से कोई रहबर

लग जाती उसे यह खबर

गुलजार रहती थी कभी गलियां

खिल जाते फूल,रहती जो कलियां

बादल बिखरने लगते फलक में

फिजा होती रंगीन,इक झलक में

आएगा पल,कब वो सुनहरा

खुशबू कब बदन सहलाए

तुम दुआ करो दिल से–2

क्यों खफा हुए मुझसे

पूछा कई बार उससे

यादों के झरोखे से चुराए लम्हें

न जाने क्यों पाला वहमें

आज भी खुला है दरवाजा

तुम हो कहां,वापस आ जा

इंतजार कर रहा कब से

बस यही इल्तिजा है रब से

रूठी खुशियां फिर से लौट आए

तुम दुआ करो दिल से–2

मेरा यार मिल जाए

मेरा खोया प्यार मिल जाए

बिछड़े हुए हम अर्से से

बस मिल जाए मुझसे

तुम दुआ करो दिल से–2

…………………………………….

राजेंद्र कुमार सिंह

लिली आरकेड,फलैट नं-101

इंद्रानगर,वडाला पाथरडीह रोड

मेट्रो जोन,नाशिक-09,ईमेल: rajendrakumarsingh4@gmail.com

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