तेजतर्रार उपजिलाधिकारी प्रियंका के कार्यों से नारी सशक्तिकरण को तहसील में मिला बल
-स्थानांतरण से पूर्व निर्भीक, निडर व भ्रष्टाचार के जीरो टॉलरेंस पर कड़े फैसले कार्यकाल के बने नजीर !

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क
-अंडर ट्रेनिंग के दौरान मलवाँ ब्लाक में भ्रष्टाचार की खोली थी परतें
-खादी के साथ कर्मचारियों की गठजोड़ पर पत्राचार के माध्यम से हुई कड़ी कार्रवाई
फतेहपुर : कोविड-19 के संक्रमण काल के दौरान उपजिलाधिकारी बिंदकी रही प्रियंका सिंह के 6 माह से अधिक के कार्यकाल के दौरान उप जिलाधिकारी के द्वारा लिए गए। ठोस फैसले मेहनत निर्भीकता व कार्यकुशलता की छमता ने मलिक सशक्तिकरण का उदाहरण समाज को एक किया कार्यकाल के दौरान ईमानदार छवि व प्रत्येक जरूरतमंद गरीब की मदद व इंसाफ के चलते न्यायप्रिय उच्चाधिकारियों की श्रेणी में आम जनमानस ने लाकर खड़ा कर दिया तहसील के लोगों की माने तो अल्प समय में ही ईमानदार अधिकारी की जो छवि , कार्यशैली के दौरान प्रियंका की दिखी वह अविस्मरणीय है। उनमें पूर्व जिला अधिकारी आंञनेय सिंह की झलक दिखती थी। भ्रष्टाचार पर कड़ी कार्रवाई की जो ललक पूर्व जिलाधिकारी में थी।
जब भ्रष्टाचार पर खोली मलवाँ ब्लाक की पोल !
वही कार्यशैली अंडर ट्रेनिंग के दौरान खंण्ड विकास अधिकारी ( बीडियो) की जिम्मेदारी मिलने पर भ्रष्टाचार की जड़ों पर चोट कर जीरो टॉलरेंस की कार्यशैली से भ्रष्ट कर्मचारियों सहित प्रधान की तिकड़ी की परतें खोल कर रख दी थी। लगभग 3 माह के कार्यकाल के दौरान दागी कर्मचारियों का तबादला अमौली हुआ तो कई निलंबित भी हुए।
पंचायती राज ,मनरेगा के कामों में धांधली व अनियमितता का हुआ था। खुलासा ?
कई कर्मचारियों के पंचायती राज में कराए गए कार्यों की फाइल खुलने से मलवाँ ब्लाक की राजनीति में हड़कंप मच गया था। परतें खुली तो पता चला कि जो काम नहीं हुए उनका भी भुगतान हो गया।
ऐसे में अधिकारियों की जांच पड़ताल के दौरान कई कर्मचारी निलंबित हुए।
तत्कालीन जिलाधिकारी संजीव कुमार ने स्वयं मौके में जाकर मनरेगा कार्यों की धांधली व अनियमितता पकड़ी थी।जो डीएम व तत्कालीन बीडिओ के स्थानांतरण होते ही फिलहाल कागजी फाइलों में दबकर रह गई। जिससे दागी कर्मचारियों के हौसले बुलंद हैं।
तीन माह के कार्यकाल के दौरान जनता के बीच ऐसा संदेश गया कि भ्रष्टाचार को लेकर सख्त बीडीओ से न्याय की उम्मीद लोगों में बढ़ गई वर्तमान समय में पुनः दागी कर्मचारियों की पहली पसंद मलवाँ ब्लाक में बहाली होते ही सारी मेहनत में पानी फिर गया। लेकिन अधिकारियों ने अपनी कार्यशैली से दागियों को परिचय दे दिया कि किसी भी सूरत में उनके कार्यकाल में दागी बच नहीं पाएंगे।
दोयम दर्जे की राजनीति के साथ मौका परस्त कर्मचारी व अधिकारियों के साथ प्रधान की तिकड़ी आगे क्या गुल खिलाएगी यह समय के गर्भ में छिपा है। लेकिन जैसा इमानदार उच्चाधिकारी जनता के बीच होना चाहिए वह लोगों को मिला भी ऐसे में लोगों की आशाएं भी अपने अधिकारी से बढ़ गई थी आखिर बड़े भी क्यों ना जो एक अच्छे अधिकारी के सभी गुण जो उनमें विद्यमान है। समाज को ऐसे अधिकारियों की ही जरूरत है।
अस्वस्थ होने के बावजूद लोगों का रखा ख्याल
कोरोनावायरस संक्रमण काल के दौरान दूसरी लहर में उप जिलाधिकारी रही प्रियंका अस्वस्थ हो गई तो तहसील की समूची व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने के साथ उच्चाधिकारियों के साथ पत्र व्यवहार पर भी असर पड़ने की संभावना दिखी लेकिन दृढ़ संकल्प व इच्छाशक्ति के बलबूते संक्रमित होने के बावजूद उच्चाधिकारियों को पल-पल की रिपोर्ट तहसील की देती रही जिससे सामंजस्य के साथ जरूरी आवश्यक कार्य गतिमान रहे।




