कला-साहित्य
तड़पती लड़की

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क
निकाली गई थी वो लड़की
इसी माह के बरसात में
पाओ नंगे और कुछ
अर्धनग्न उसके शरीर थे,
क्योंकि उसके पिता ने
दहेज़ के पैसे नही भरें थे,
रोती रही वो गिड़गिड़ाती
रही और देती रही वो
सौगंध अपनी बच्ची की,
सुना न कोई समझा न
कोई उसकी इस फरियाद को,
बचा न कोई उम्मीद
देख कर चली वो अपने
बाबा के घर आँख से
आंसू बरस रहे थे
और आसमां भी आज
खूब गरज रहे थे,
बच्ची को गोद मे छूपा
रही थी खुद थरथर
वो कांप रही थी
पाओ में ठोकर लगते
थे उसके पर दर्द का
अहसास न हुआ है उसको
किया अपनो ने जो जुर्मसितम
उसी के आग में वो जल रही थी।।
— लवली आनंद
मुजफ्फरपुर , बिहार




