कला-साहित्य
दोहा छंद – प्रभु श्रीराम

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क
सुमिरन मन मा राम के, बन जाही सब काम।
कर ले जस के काम जी, जग मा होही नाम।।
सब के अंतस राम हे, सबो जगह रघुवीर।
देखाये हनुमान जी, अपने छाती चीर।।
आवत हो ही राम हा, सबरी आस लगाय।
दरसन होही राम के, निसदिन फूल बिछाय।।
बन-बन भटके राम जी, करै सिया के खोज।
लक्ष्मण हावय संग मा, सब ला पूछय रोज।।
सुग्घर पबरित धाम हे, अवधपुरी दरबार।
राम लला भगवान हर, लिये मनुज अवतार।।
राजकुमार निषाद”राज”
बिरोदा धमधा जिला-दुर्ग छत्तीसगढ़
7898837338




