लखनऊ

नवयुग में नेशनल वेबीनार का आयोजन

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क

लखनऊ। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के शुभ संध्या पर नवयुग कन्या महाविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना शिविर एवं रेड रिबन के संयुक्त तत्वाधान में एक दिवसीय नेशनल वेबीनार का आयोजन प्राचार्य प्रोफेसर मंजुला उपाध्याय की अध्यक्षता में किया गया इस कार्यक्रम का प्रारंभ ईश मंगलाचरण से कार्यक्रम अधिकारी राष्ट्रीय सेवा योजना डॉक्टर वंदना द्विवेदी ने किया यह वेबीनार अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की थीम जेंडर इक्वलिटी फॉर ए सस्टेनेबल टुमारो अर्थात एक अस्थाई कल के लिए आज लैंगिक समानता विषय पर रखी गईथी विषय प्रवर्तन तथा अतिथियों का स्वागत एवं कार्यक्रम का संचालन डॉ वंदना द्विवेदी के द्वारा किया गया ।

सम्मानित विदुषी अतिथि वक्ता प्रोफेसर उमारानी त्रिपाठी पूर्व विभागाध्यक्ष एवं डीन महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ वाराणसी का एवं डॉअनामिका चौधरी एसोसिएट प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष अर्थशास्त्र डा एस, एम, एन, आर. वि०वि०लखनऊ का व्यक्तित्व परिचय कार्यक्रम अधिकारी राष्ट्रीय सेवा योजना डॉ नेहा अग्रवाल द्वारा दिया गया एवं प्रोफेसर सुचिता पांडे प्राचार्य बी.एन.के.बी पीजी कॉलेज अंबेडकर नगर का, सुश्री स्वाति मिश्रा एनर्जी एनालिस्ट आईआईटी मद्रास का संक्षिप्त व्यक्तित्त्व- परिचय कार्य क्रम अधिकारी राष्ट्रीय सेवा योजना डॉक्टर नीतू सिंह के द्वारा दिया गया द्यइस कार्यक्रम में सम्मानित वक्ता के रूप में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ वाराणसी के पूर्व विभागाध्यक्ष तथा कला संकाय अध्यक्ष प्रोफेसर उमारानी त्रिपाठी ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारत में सुसंस्कृत नारी को राष्ट् की सुदृढ़ शक्ति तथा समाज को धारण करने वाली और देवी स्वरुपा माना गया है ।

द्य वैदिक काल में भी हम देखते हैं कि महिलाओं को समान अधिकार पुरुषों के बराबर प्राप्त था उस समय महिलाएं शास्त्रार्थ में भाग लेते थे और युद्ध करने भी जाती थीद्यदूसरी सम्मानित वक्ता के रूप में डॉ अनामिका चौधरी एसोसिएट प्रोफेसर विभागाध्यक्षा अर्थशास्त्र ,डा ०एस. एम. एन. आर. विश्व विद्यालय लखनऊ रहीं उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि समाज में लैंगिक समानता सदियों से से चली आ रही है यद्यपि बीते कुछ दशकों में थोड़ा कमी आई है किंतु वह पर्याप्त नहीं है ।

भारत में महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा मिला है, महिलाओं के उत्थान के लिए एक स्वस्थ परिवार की महत्वपूर्ण आवश्यकता है जो राष्ट्र के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक है व्याख्यान के इसी क्रम में तृतीय सम्मानित वक्ता के रूप में प्रोफेसर डॉक्टर सुचिता पांडे उपस्थित थी जो बी.एन.के.बी.पी.जी कॉलेज अंबेडकर नगर की प्राचार्य हैं उन्होंने महिला सशक्तिकरण पर बोलते हुए कहा कि राजनीति में महिला आरक्षण तथा नेतृत्व क्षमता मिलनी चाहिए ।

स्थानीय निकायों में पंचायत स्तर पर हम देखतें हैं कि कुछ महिलाएं अपने को साबित करने का प्रयास कर रही हैं लेकिन कहीं-कहीं परिवारों में पुरुषों का हस्तक्षेप है इसके बावजूद महिलाओं को यदि अवसर मिलता है तो अपना नेतृत्व अच्छे से प्रदर्शित करती ही हैं बडी विडम्बना है कि सामाजिक स्तर पर महिलाएं एकजुट नहीं हो पाती हैं जब तक कोई बड़ा कांड नहीं हो जाता है, महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति सजग होना होगा तथा एकजुट होना पडेगा जो आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है, पंडिता रमाबाई सरस्वती ,अमृता देवी आदि नारी शक्तियों ने अपने को उदाहरण के रुप में पेश किया वहीं चिपको आंदोलन में महिलाओं की भूमिका सराहनीय रहीं, कई नारी शक्तियों का उन्होंने उदाहरण दिया ।

इसी क्रम में सम्मानित वक्ता के रूप में आभासी मंच पर मद्रास से सुश्री स्वाति मिश्रा जो एनर्जी एनालिस्ट आईआईटी मद्रास रिसर्च पार्क उपस्थित थी पीपीटी के माध्यम से उन्होंने जेंडर इक्वलिटी और इन्वायरमेंट, क्लोजिंग द जेंडर गैप, प्रमोशन एडवांसमेंट एंड लीडरशिप इन जेंडर डायवर्सिटी इन एनर्जी सेक्टरआदि को उन्होंने अपने व्याख्यान में केंद्रित कियाद्य इसके बाद कार्यक्रम का अध्यक्षीय उद्बोधन नवयुग कन्या महाविद्यालय की प्राचार्य प्रोफेसर मंजुला उपाध्याय द्वारा किया गया उन्होंने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि हम सभी जानते हैं कि परिवार समाज की एक इकाई है और स्त्रियों के द्वारा ही यह भूमिका बखूबी निभाई जाती है द्यस्त्री स्वयं शक्ति का स्वरुप है।

वह अशक्त या अक्षम नहीं है बल्कि समय के साथ अवसर नहीं प्राप्त हुआ था जो उसे मिलना चाहिए था, आज समय की मांग है कि महिलाओं की दशा एवं दिशा में थोड़ा परिवर्तन लाने की जरूरत है इसमें मनसा-वाचा-कर्मणा प्रयास करने से ही सकारात्मक प्रगति संभव है यह शिक्षा से ही संभव है, शिक्षा में भेदभाव परिवार और समाज में न किया जाए शिक्षा से ही महिलाओं का सर्वांगीण विकास संभव है, महिलाओं को संविधान सरकार परिवार द्वारा दीर्घ अवसरों का पूर्ण लाभ उठाते हुए अपनी दक्षता साबित करनी चाहिए क्योंकि उनके समक्ष कई चुनौतियां हैं अच्छी पदों पर महिलाओं की नियुक्ति कम है निर्णायक भूमिका देने से समाज बचता है और मिल जाने पर बाधाएं भी उत्पन्न करता है।

इन बातों की परवाह न करते हुए नारी शक्ति को आगे बढ़ना चाहिए और अपने मुकाम को हासिल कर अमित छाप छोड़नी चाहिए कार्यक्रम के अंत में कार्यक्रम अधिकारी राष्ट्रीय सेवा योजना डॉक्टर प्रतिमा घोष के द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया और आभासी मंच से जुड़े हुए सभी लोगों के प्रति आभारएवं कृतज्ञता ज्ञापन भी व्यक्त किया गया इस वेबीनार में आभासी मंच के माध्यम से महाविद्यालय की सभी सम्मानित प्रवक्ता गण एवं -छात्राएं जुड़ी हुई थी।

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