सेहत

नसों में ब्लॉकेज होने पर शरीर में दिखते हैं ऐसे लक्षण, हो जाएं सावधान

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क

खराब लाइफस्टाइल के चलते कई तरह की बीमारियों का जन्म हो रहा है। शरीर में पोषक तत्वों की कमी और गलत खान-पान के कारण रक्त वाहिकाओं में कोलेस्ट्रॉल जमना शुरु हो जाता है। कोलेस्ट्रॉल जमने से नसें ब्लॉक होने लग जाती हैं जिसके कारण शरीर में ब्लड की सप्लाई प्रभावित होने लगती है। इसके अलावा धमनियों में ब्लॉकेज होने के कारण हार्ट की कार्यक्षमता भी कम हो जाती है। ऐसी परिस्थिति में दिमाग तक ऑक्सीजन सप्लाई होने की प्रक्रिया भी प्रभावित होने लगती है। नसें ब्लॉक होने से व्यक्ति को दिल का दौरा भी पड़ सकता है। नसें ब्लॉक होने पर शरीर में कुछ लक्षण दिखते हैं। तो चलिए जानते हैं इसके लक्षण और आप इससे कैसे अपना बचाव कर सकते हैं….

थकान

नसें ब्लॉक होने के कारण शरीर में थकान महसूस होने लगती है। यदि आप थोड़ा सा काम करने पर थक जाते हैं तो यह नसों में ब्लॉकेज होने का संकेत हो सकता है। नसें ब्लॉक होने के कारण हार्ट को ज्यादा काम करना पड़ता है जिसके कारण शरीर में थकान महसूस हो सकती है।

पसीना

शरीर में पसीना आना भी नसों में ब्लॉकेज का संकेत हो सकता है। जब हार्ट को जरुरत से ज्यादा काम करना पड़ता है तो शरीर का तापमान बढ़ने लगता है। अगर आपको ज्यादा पसीना आता है तो आप इसे हल्के में ना लें ।

छाती में दर्द

छाती में दर्द भी नसों में ब्लॉकेज का संकेत हो सकता है। हार्ट शरीर में ताजे खून की सप्लाई करता है। इस खून में कई सारे न्यूट्रीएंट्स और ऑक्सीजन मौजूद होते हैं यह न्यूट्रिएंट्स और ऑक्सीजन शरीर के लिए आवश्यक होते हैं। ऐसे में जब नसें ब्लॉक हो जाए तो व्यक्ति की छाती में दर्द हो सकता है।

छाती में जलन

छाती में जलन भी नसों की ब्लॉकेज का कारण हो सकता है। पाचन संबंधी समस्याओं की समस्या समझकर बहुत से लोग छाती में होने वाली जलन को इग्नोर कर देते हैं परंतु यह हार्ट अटैक का ही संकेत हो सकता है। इस लक्षण को नजरअंदाज करने पर हार्ट अटैक आ सकता है ऐसे में इस पर गौर करना चाहिए।

सांस लेने में परेशानी

सांस लेने में भी तकलीफ होना इसी समस्या का लक्षण है। नसें ब्लॉक होने पर शरीर के अंगों पर दबाव पड़ने लगता है जिसके कारण सांस लेने में तकलीफ होती है। नसें ब्लॉक होने पर फेफड़ों में प्रेशर पड़ता है जिसके कारण सांस लेने में दिक्कत होती है।

ऐसे करें बचाव

. अपनी डाइट में नमक, चीनी और कॉफी का सेवन कम करें।

. एल्कोहल, सिगरेट और नशीले पदार्थ का सेवन न करें।

. डेली रुटीन में बीपी चेक करवाते रहें।

. हर छोटी सी बीमारी में दवाई न लें। यदि समस्या बढ़ रही है तो एक बार डॉक्टर से पूछकर ही कोई दवाई लें।

. इस समस्या से बचने के लिए ज्यादा स्ट्रेस न लें, नियमित रुटीन में एक्सरसाइज करें।

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