कला-साहित्य

प्यार एक –रंग अनेक —

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क

(रंग—-एक )

सुकून और स्नेह के
हरसंभव तलाश की कोशिश
चाहत ,खुशहाल जिन्दगी की
जेहन में समेटे
संताप/यंत्रणा/तनाव
के कशमकश को झेलती
दिनचर्या से कोसों दूर
एक क्षणिक/काल्पनिक
सुखद एहसास,,,,,,,

(रंग —दो)

अप्रतिम सौन्दर्य की चाहत
रूमानी जिन्दगी की हसरत
खुशनुमा भविष्य की ख्वाहिश
करार की सरगोशियों की सताइश
मुकद्दर के यकीं की आजमाइश ,,,,,,,,,,,

(रंग-तीन)

संग दिल दुनिया में
थोड़ी सी ख़ुशी
लफ्ज़ दर लफ्ज़
उम्मीद का एहसास
यदा कदा
खामोश लहजे में
बेरुखी की गुफ्तगू
मंजिल बिलकुल करीब
पर सराबों की मानिंद
(सराबों-मृगतृष्णा)

(रंग -चार )

बेफिक्र सी फितरत
दर्द की बात बेमानी
गरिमा/करुणा/अनुभूति
सब लगती अनजानी
साथ हो के भी बेगानापन
निहित स्वार्थ सर्वोपरि
एक विकृत विरूप
शिथिल मुस्कान ,,,,,,,,,

राजेश कुमार सिन्हा
मुम्बई

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