कला-साहित्य

भाभी माँ

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क

घर में शादी का माहौल था। सभी लोग खुश थे। नाच- गाने का मनोरम दृश्य  अवसर था। सुबह की बेला बीत रही थी। धीरे -धीरे दोपहर का समय हो रहा था। सभी लोग खाने के लिए जा रहे थे, ऐसे में खुशी की चाची ने राधा से कहा,” तुम अपना और खुशी दोनों का खान यहीं लेती आओ।” राधा किचन में गई और अपना और खुशी का खाना निकालने लगी। वह खाना निकाल ही रही थी कि उसकी भाभी ने खुशी का खाना निकालने से मना किया। ऐसे में राधा को थोड़ा दुख तो  हुआ लेकिन वह केवल खुशी का खाना लेकर आ गई। जब खुशी ने देखा कि राधा बैठ चुकी है और अपनी प्लेट नहीं लाई तो उसको लगा शायद राधा को अभी भूख नहीं है। वह खाने लगी लेकिन थोड़ी देर बाद खुशी ने राधा को देखा तो  उसकी आँखों में अश्रु थे।उसने पूछा भी लेकिन राधा ने कुछ नहीं कहा। पीछे से भाभी आ गई और जोर से चिल्लाकर बोली, ” क्या बात है, बोलती क्यों नहीं।” भाभी की तेज आवाज़ सुनकर खुशी थोड़ी सहम गई। उसे तो कोई अंदाज़ा ही नहीं था कि  हुआ क्याहै। बस, राधा की आँखों  के अश्रु उसे परेशान कर रहे थे। खुशी ने भाभी से कहा,” भाभी प्यार से पूछिए, चिल्लाने की क्या ज़रूरत है? प्यार से सब ठीक हो जाता है।” यह सुनकर भाभी और चिल्लाने लगी। सभी लोग देख रहे हैं, यह सोचकर खुशी में मामले को सुलझाने का प्रयास किया और राधा को समझाया लेकिन राधा तो और भी  फूट-फूटकर रोने लगी। अब खुशी समझ चुकी थी कि  जरूर कुछ ऐसा हुआ है जिसकी वज़ह से राधा अपना खाना नहीं लाई और कुछ बताई  भी नहीं क्योंकि अगर बता देती तो शायद खुशी भी नहीं खाती। आज खुशी मन- ही- मन सोच रही है कि क्या भाभी भी कभी माँ हो सकती है । शायद कभी नहीं कभी नहीं…….

   अनुराधा प्रियदर्शिनी

  प्रयागराज उत्तर प्रदेश

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