मऊ जनपद में विश्व ट्रामा दिवस पे लोगो को किया गया जागरूक

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क
मऊ जनपद के शारदा नारायन हास्पिटल में विश्व ट्रामा दिवस के अवसर पर आज सोसाइटी फॉर इमरजेंसी मेडिसिन इंडिया व शारदा नारायन हास्पिटल के संयुक्त तत्वाधान में एक जनजागरूकता कार्यक्रम अयोजन किया गया जिसमें शारदा नारायन हास्पिटल इमरजेंसी क्रिटिकल केयर स्पेशलिस्ट एव सेमि यूपी चैप्टर के अध्यक्ष डॉ सहित सिंह ने कहा की हर साल पूरी दुनिया में 17 अक्तूबर को विश्व ट्रॉमा डे मनाया जाता है। इसे आधुनिक युग यानि आज के दौड़भाग वाले जीवन की महामारी भी कहा जा रहा है। यह दिन हमें ये बताता है कि दुर्घटनाओं, चोटों और मानसिक बीमारियों की दर लगातार बढ़ती जा रही है।(विश्व स्वास्थ्य संगठन) का कहना है कि ट्रॉमा विश्व भर में मृत्यु और विकलांगता का सबसे बड़ा और प्रमुख कारण है। अगर लोगों को मुश्किल परिस्थितियों में इससे निबटने के उपायों के बारे में ठीक तरह से जानकारी मिल जाए और उनको इससे निपटने के लिए जरूरी प्रशिक्षण दिया जाए तो काफी हद तक इन मौतों और विकलांगता को रोका जा सकता है। इस तरह की मौतों पर अंकुश न लग पाने का सबसे बड़ा कारण लोगों को इसके बारे में जरूरी प्रशिक्षण न होना भी है। इस अवसर पर हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ राहुल ने कहा की ट्रॉमा यानी ऐसी दर्दनाक घटना जो व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से नुकसान पहुंचाती है। यह किसी भी कारण से हो सकती है जैसे – कोई एक्सिडेंट, परिवार के सदस्य या मित्र का निधन, तलाक, बीमारी, कोई प्राकृतिक आपदा, घरेलू हिंसा आदि।’
आगे न्यूरो सर्जन डॉ रुपेश ने बताया की देश में हर साल दस लाख लोग हेड इंजरी के शिकार होते है,जिनमे 75 से 80 फीसदी लोगो में सड़क दुर्घटना के कारण होती है। हेड इंजरी का शिकार 50 फीसदी लोग मर जाते है तो 25 फीसदी लोग विकलांग हो जाते है। यह आंकड़े आपको डराने के लिए नहीं बल्कि सचेत करने के लिए बताये जा रहे है। इन आंकड़ों में आपकी सावधानी कमी ला सकती है। पिछले दो दशक में सड़क दुर्घटना के कारण होने वाली मौत व बीमारियों में 64 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गयी है।




