कला-साहित्य

मन का मैल

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क

कई बार खतरनाक चीज भी

इतनी खतरनाक नहीं होती

जितना कि हम समझ लेते हैं

उनसे डरते हैं

उनसे दूर भागते हैं

हां वे गलत होती हैं

पर इतनी गलत नहीं जितनी कि

दिल में छुपा हुआ कपट होता है

जितना कि दिल में छुपा हुआ

पाप होता है

आंख में पड़ा तिनका

इतना खतरनाक नहीं होता

पैर में फंसा हुआ कांटा भी

इतना खतरनाक नहीं होता

और रुई में दबी जो आग होती है

वह भी इतनी खतरनाक नहीं होती

जितना कि यह पाप होता है

जो दिल में छुपा होता है

और कपट कितना कुछ

बदल देता है

किसी को भी नुकसान

पहुंचा सकता है

जिसके मन में कपट है

उसका तो नुकसान होता है

और वह सामने वाले का भी

नुकसान करता है

कुछ चीजें परेशान करती हैं

कुछ चीजें दर्द देती हैं

लेकिन यह मन का जो मैल होता है

वास्तव में बहुत ही भयानक होता है

रितु शर्मा

दिल्ली

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