सहारनपुर

मांगों को लेकर किसान कमिश्नरी पर गरजे

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क

किसानों देश की रीढ, सरकार चेते नहीं तो होंगे गंभीर परिणाम़: अशोक मलिक

सहारनपुर। अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रमानुसार आज पश्चिम प्रदेश मुक्ति मोर्चा से जुड़े किसानों ने कमिश्नरी का घेराव कर जोरदार नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। आक्रोशित किसान सड़क पर ही बैठ गये। किसानों कि मंशा को भांपते हुए किसानों के बीच में पहुंचकर कमिश्नर एम.लोकेश ने ज्ञापन लिया तथा उन्हें आश्वासन दिया कि महामहिम राष्ट्रपति को किसानों का 19 सूत्रीय ज्ञापन प्रेषित कार्यवाही हेतु भेज दिया जायेगा।

प्रदर्शनकारियों को सम्बोधित करते हुए पश्चिम प्रदेश मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भगत सिंह वर्मा ने कहा कि जब तक उत्तर प्रदेश को चार भागों में बांटकर पृथक पश्चिम प्रदेश का निर्माण नहीं किया जाता तब तक प्रदेश का विकास संभव नहीं है। उन्हांेने कहा कि देश के अन्नदाता किसानों को उनकी फसलों का लाभकारी मूल्य दिलाया जाये, सरकारो की गलत नीतियों के कारण देश के किसानों पर बढ़ते कर्ज को समाप्त किया जाये। किसानों से बैंकों में केसीसी ऋण पर प्रतिवर्ष केवल ब्याज ही जमा कराया जाये। उन्होंने कहा कि जब तक किसानों की समस्याओं का निराकरण नहीं होगा किसान आंदोलन हेतु मुखर रहेंगे।

प्रदर्शनकारियों को सम्बोधित करते हुए राष्ट्रीय प्रवक्ता डा.अशोक मलिक व हाफिज मुर्तजा त्यागी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ने संयुक्त रूप से कहा कि यूपी के किसानों को गन्ने का लाभकारी रेट 600 रूपये प्रति कुन्तल दिलाया जाये। उन्होंने कहा कि प्रदेश की चीनी मिलों से प्रदेश के गन्ना किसानों को बकाया गन्ना भुगतान दिलाया जाये, राष्ट्रीय किसान आय आयोग और राज्य किसान आय आयोग का गठन कराया जाये। मनरेगा योजना को सीधा खेती से जोड़कर मजदूर उपलब्ध करायें। देश में किसानों को तेलंगाना, पंजाब की तरह कृषि कार्य हेतु निःशुल्क बिजली दिलायी जाये, उत्तर प्रदेश की आम जनता को घरेलू बिजली 300 यूनिट तक निःशुल्क दिलायी जाये अन्यथा किसान संघर्ष को बाध्य रहेगा।

उन्होंने चेतावनी दी कि सरकार किसानों के प्रति गंभीर नहीं है इसलिए किसान सड़कों पर आकर प्रदर्शन करने को बाध्य हो रहा है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि किसानों की मंशा के अनुरूप सरकार कार्य नहीं कर रही है जिससे किसानों की हकतल्फी हो रही है। इसलिए किसान आत्महत्या करने को मजबूर हो रहा है। जो देश व प्रदेश के लिए घातक साबित होगा।

आप के प्रदेश अध्यक्ष सोमेन्द्र ढाका व प्रदेश महासचिव मनीष सिंह, जिलाध्यक्ष अंकुश चौधरी ने कहा कि भाजपा सरकार किसानों की सुध नहीं ले रही है। किसान देश का अन्नदाता है, यदि किसान एक बार फिर सड़कों पर उतर आया तो केन्द्र व प्रदेश की भाजपा सरकारें हिल जायेंगी। इसलिए समय रहते किसानों की सुध ली जाये।

पूर्व राज्य मंत्री विनोद तेजयान ने कहा कि भाजपा सरकार देश में एक फिर बंटवारा स्कीम चलाकर देश के टुकड़े करना चाहती है, जिसे देश व प्रदेश की जनता समझ चुकी है। उन्हांेने कहा कि किसानों पर कुठाराघात किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। उन्होंने भूमि

अधिग्रहण में किसानों को एक समान मुआवजा दिये जाने की मांग की।

कांग्रेस जिलाध्यक्ष चौ.मुजफ्फर अली ने कहा कि भाजपा देश को गर्त में ले जाने का काम कर रही है। देश मे महंगाई चरम सीमा पर है। लेकिन भाजपा सरकार देश की जनता के प्रति गंभीर नहीं है। विकास की बजाय देश को उद्योगपतियों के हाथों बेचना चाहती है। उन्होंने महंगाई पर लगाम कसने की मांग प्रदेश व देश की भाजपा सरकार से की। उन्होंने कहा किसान के मन की बात भी प्रधानमंत्री समझे।

धरने की अध्यक्षता जाट समाज के अध्यक्ष चौ.बख्तावर सिंह व संचालन रविन्द्र चौधरी गुर्जर ने किया। इससे पूर्व किसानों ने भगत सिंह वर्मा के नेतृत्व में तल्हेडी फाटक से जुलूस निकाल कोर्ट रोड होते हुए कलेक्ट्रेट तिराहे पर जाम लगाया तत्पश्चात दिल्ली रोड स्थित कमिश्नरी पहुंचे तथा आंदोलन कर सरकार को चेताने का काम किया।

प्रदर्शनकारियों को सम्बोधित करने वालों में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विरेन्द्र चौधरी, प्रदेश सचिव मौ.वसीम व चौ.ऋषिपाल प्रधान, मण्डल उपाध्यक्ष स.गुरविन्दर सिंह बंटी, इरशाद सोनी, प्रदेश सचिव सतेन्द्र सोलंकी, किसान नेता चौ.प्रीतम सिंह, चौ.शिव कुमार गुर्जर, मौ.कामिल, मुकर्रम प्रधान, ओमपाल प्रधान, मौ.राव रजा, जिला पंचायत सदस्य सुधीर चौधरी, नीरज सैनी मुख्य रहे।

प्रदर्शनकारियों में महबूब हसन, काजी बुद्धू हसन, नैन सिंह सैनी, मांगेराम सैनी, मौ.यासीन, डॉ. तारिक मौ., मूसा अहमद, मौ.रईस, मो.राशिद, मौ.तबरेज, डॉ. साजिद बबलू मलिक, पिंटू चौधरी भाउपुर, मनोज, बबलू, अनुज वर्मा एड., मनोज चौधरी, राजेन्द्र चौधरी, हरेन्द्र सिंह प्रधान, सहदेव, हरपाल, नरेन्द्र, नीटू प्रधान, ब्रजभूषण शर्मा, सोनू शर्मा, नीलू सिंह मास्टर, शाहनवाज, के.पी.सिंह, रितिक शगुन, सागर चौधरी जीशान व मुस्तकीम आदि हजारों की संख्या में किसान मौजूद रहे।

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