कला-साहित्य

मैंने सूरजमुखी होना चुना..

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क

किसी ने पसंद की ग़ुलाब की मादकता

तो किसी ने उसका चटख लाल रंग

उसके कांटों पर तो शायद ही किसी का मन मचला हो ,

कोई उलझा रहा गेंदों के पीलेपन में

तो कोई मोगरे की खुशबुओं में ,

किसी को भाया यौवन

धूप की रानी का ,

तो कोई खोया रहा

रात की रानी के सपनों में ,

कोई रीझ गया सदाबहार की सादगी पर ,

तो किसी के मन भा गई

छुई मुई की नाजुकता ,

किसीने तोड़े गुच्छे गुलमोहर-अमलतासों के

तो कोई पूजता रहा कमल को..

फूलों की इस लंबी सी फेहरिस्त में

मैंने सूरजमुखी ही चुना..

उसका धूप सा पीला रंग..उसका अथक इंतजार

हां , मैंने सूरजमुखी होना चुना !!

नमिता गुप्ता “मनसी”

मेरठ , उत्तर प्रदेश 

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