कला-साहित्य

योगा

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क

योगा से जब से जुड़े हैं हम,

स्वस्थ रहे तब से तन मन

रोगों को दूर करता योगा,

उत्साह स्फूर्ति भरता योगा।

प्रात काल तुम उठ जाओ,

थोड़ा ईशसे ध्यान लगाओ।

शुद्ध वायु का सेवन कर लो

थोड़ा भ्रमण और आसन कर लो‌

बालक बूढ़ा और जवान,

योग है सबके लिए आसान।

चुस्ती ,फुर्ती सबको मिलती,

बीमारी भी सारी घटती।

प्राणायाम सहित आसन कर लो,

थोड़ी भ्रामरी हास्यासन कर लो।

नेत्र सुरक्षा कर लो आप,

कम होंगे सारे विकार।

मिलजुल कर सब योगा करें,

महता उसकी बतलाती आज।

भूलों ना तुम निज संस्कृति को,

योग है पुरातन की पहचान।

योग तो है सुखों की खान,

करता जन जन का कल्याण।

योग करो और करवाओ,

सब को स्वस्थ यहांँ बनाओ।

              रचनाकार ✍️

              मधु अरोरा

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