कला-साहित्य

योग विद्या

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क

होता जीवन का ‘योग’ सार,

इसमें शक्ति मानिए अपार।

आलस को यह दूर भगाता,

महिमा जाने, सभी संसार।

देता यह आरोग्य  हमें,

रखे स्वास्थ्य की सार सँभार।

योग बने जीवन आधार,

सद्ग्रंथों का ये ही सार।

जो व्यायाम नहीं करता।

होता है जल्दी वह बीमार।

पैसा- मान धरा रह जाता।

यदि अस्वस्थ, जीवन बेकार।

योग जिंदगी में अपनाएं

खुशियों की होगी भरमार

ध्यान -धारणा ईश दिलाए

होता वीनू योग का सार।

वीनू शर्मा,जयपुर,राजस्थान

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