शिकारी खुद है शिकार

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क
यह जो फैला हुआ है यहां आजकल
सब वस्तुओं में मिलावट का व्यापार,
कर रहा है यह बड़ी तेजी से खराब
हमारे समाज के स्वास्थ्य का आधार।
खाद्य तेल, घी में मिलावट करने वाले
मुनाफा कमा समझे खुद को होशियार,
दूध,पनीर में मिलावट करने वालों का
वो भी हो सकते हैं संभावित शिकार।
आटा, राशन में मिलावट करने वाले
मुनाफा कमा समझे खुद को होशियार,
इंजेक्शन से सब्जी बड़ी करने वालों के
वो भी हो सकते हैं संभावित शिकार।
नकली मिठाइयों का करके कारोबार
बन कर बैठे हुए हैं जो यह बड़े साहूकार
नकली दवाइयां बनाकर बेचने वालों के
वो भी हो सकते हैं संभावित शिकार।
जनता से रिश्वतें खाकर बने हुए हैं जो
आजकल के समाज में बड़े रसूखदार,
बड़े-बड़े निजी अस्पतालों की लूट के
वो भी हो सकते हैं आसानी से शिकार।
वास्तव में जो इंसान कर रहा है अपने
समाज में ठगी, मिलावट और भ्रष्टाचार,
खुद को समझता है गलती से शिकारी
लेकिन है वो खुद भी दूसरों का शिकार।
जितेन्द्र ‘कबीर’
संपर्क सूत्र – 7018558314




