कला-साहित्य
ज़िंदगी पास तो आ

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क
ज़िंदगी पास तो आ,तुझे गले लगाऊँ,
चिर निद्रा में खोई हूँ, पुनः खुद को जगाऊँ।
हँसना चाहती हूँ फिर से नीले नीले गगन तले,
स्वप्निल पँखों पर सवार बहुत दूर मैं उड़ जाऊँ।
इन नयनों ने सपने हैं हज़ार बुने,
सुवासित वातावण,शुद्ध श्वास मिले।
महामारी से मुक्त हो यह विश्व हमारा,
आरोग्य का हमें ईश वरदान मिले।
सर्वत्र हो खुशियाँ हीं खुशियां,
दुःख संताप को न स्थान मिले।
लौट आये वो उन्मुक्त बचपन,
निश्छल,सुरभित जहान मिले।
उदर क्षुधा से ना कोई तड़पे यहाँ,
माँ अन्नपूर्णा का सबको वरदान मिले।
शिक्षित हो गाँव गाँव और शहर शहर,
भारतवर्ष को ऊँचा नाम मिले।
रीमा सिन्हा (लखनऊ)



