कला-साहित्य
॥ अपना सपना ॥

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क
नदिया बहती है बहने दो
हमें कोई परवाह ऩहीं
चिड़ियाँ उड़ती है उड़ने दो
हमें कोई सरोकार नहीं
तेरी गोद में सर रखकर
खो जाऊँगा वो पल मंजूर हमें
मन में सजी है एक सपना
उतर जाये जमीं पर मंजूर हमें
कोई जलता है जलने दो
मोम की तरह पिघलने दो
हमारा प्यार भी जाने मन
समन्दर की लहरों पे पलने दो
दूर तलक बह कर जायेगें
नदियों की संगम सा मिल जायेगें
दो जिस्म एक हो जायेगें
सतरंगी दुनियॉ बसायेगें
उदय किशोर साह
मो० पो० जयपुर जिला बाँका बिहार
9546115088



