कला-साहित्य

कहां कहां भटकूँ

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क

•  • मौसम सुहाना है ,

•  संबरना चाहिये ,

•  हुस्न को इश्क़ से,

•   मिलाना चाहिये ,

•  उड़ न जाये कहीं ,

•  ये उम्र का पंछी ,

•  ये उसको जल्दी ,

•  बताना चाहिये ,

•  शमा जला देती है ,

•  परवानों को सदा ,

•  आज तो जीभर के,

•  उसे सताना चाहिये ,

•  हो जायगा फैसला,

•   हुस्न व जमाल का ,

•  ज़मी पर  आफताब को,

•   आ जाना  चाहिये,

•   यादों की तड़प लेकर,

•   कहां – कहां भटकुं,

•  मुश्ताक़ तन्हाई में जाकर ,

•  आंसू बहाना चाहिये ,

.डॉ . मुश्ताक़ अहमद. शाह

“सहज़”  हरदा मध्यप्रदेश

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