कला-साहित्य
देव दिवाली

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क
कार्तिक पूर्णिमा का दिन महान,
इसकी महिमा जाने सारा जहान।
स्नान ध्यान का महत्व भारी,
दान धर्म अति सुख कारी।
गंगा स्नान की महत्ता भारी,
सारे घाट सजाए जाते।
जैसे जगमग करे दिवाली,
देवताओं की होती दिवाली।
पूजा करें सभी नर नारी,
यह मास श्रेष्ठ है होता।
स्वास्तिक ओम बनाए जाते,
घर घर मंगल गाए जाते।
उनकी रोशनी पहुंचे देवो तक,
देव दिवाली इसको कहते।
देवता भी आशीष है देते,
कारज उसके सारे बनते।
घाटो की होती अद्भुत शोभा,
दीप ही दीप दूर तक दिखते।
लगती छवि अति मनोहर,
जल में जैसे दीपक जलते।
गुरु नानक पर्व कहलाता,
लक्ष्मी जी का अवतरण हुआ।
विष्णु जी निंद्रा से जागे,
देवगण शिव संग काशी आए।
दीपो से था नगर सजाया,
कार्तिक पूर्णिमा का दिन महान।
इसकी महिमा जाने सारा जहान।।
रचनाकार ✍️
मधु अरोरा



