महंगाई से राहत मिलने के आसार नहीं, चालू वित्त वर्ष में खुदरा मुद्रास्फीति 5.3 फीसद रहने का अनुमान

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली : महंगाई से अभी राहत मिलने के आसार नहीं हैं। आरबीआई ने बुधवार को कहा कि खुदरा मुद्रास्फीति चालू वित्त वर्ष 2021-22 में करीब 5.3 फीसद रह सकती है। हालांकि दास ने कहां है कि यह केंद्रीय बैंक के पूर्व अनुमान के अनुरूप है। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा की जानकारी देते हुए कहा कि मुद्रास्फीति के अगले वित्त वर्ष 2022-23 की पहली तिमाही में नरम पड़कर पांच फीसद पर आने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि मुद्रास्फीति का अनुमान पूर्व के अनुमान के लगभग अनुरूप है। अल्पकाल में कीमत संबंधी दबाव बने रहने की आशंका है।
दास ने कहा, ”उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित मुद्रास्फीति के चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में 5.1 फीसद और चौथी तिमाही में 5.7 फीसद रहने की संभावना है। कुल मिलाकर इसके 2021-22 में 5.3 फीसद रहने का अनुमान है। वहीं, 2022-22 की पहली तिमाही में नरम पड़कर पांच फीसद होने और दूसरी तिमाही में पांच फीसद पर ही बने रहने की संभावना है।” उन्होंने कहा कि मौद्रिक नीति का रुख मुख्य रूप से उभरती घरेलू मुद्रास्फीति और वृद्धि गतिविधियों के अनुकूल है। दास ने कहा कि पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क तथा मूल्य वर्धित कर (वैट) को कम किये जाने से प्रत्यक्ष प्रभाव के रूप में महंगाई दर में टिकाऊ आधार पर कमी आएगी। परोक्ष रूप से ईंधन और परिवहन लागत कम होने का भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।




