कला-साहित्य
शराबी…

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क
कदम बहके से हैं
…….औऱ नजर भी ,
न ठहरती हूँ कहीं
न संभल पाती हूँ,
देखती हूं तुझे..तुझ ही से बातें करती हूँ ,
तो क्या मैं शराबी हूं !!
हाँ, नशा है तेरे “शब्दों” का
तेरी ही बातों का,
अक्सर बहक जाती हूं “सुनकर”तुझे,
तो क्या मै शराबी हूं !!
अब रहने दो यूं ही..
बहकने दो यूँ ही मुझको,
देखती हूं आज
मेरे नशे में भी
है कितना “नशा”!!
नशा किसी को पैसे का
तो किसी को ईमान का है ,
किसी को इश्क का
तो किसी को नशा नफ्रतों का है,
नशे में सब हैं
तो शराबी मैं ही क्यों !!
नमिता गुप्ता “मनसी”
उत्तर प्रदेश , मेरठ




