कला-साहित्य

सफेद आसमां

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क

कड़ाके की सर्दी में

रजाई का मोह छोड़ पाओ अगर

तो निकलो बाहर जरा

आंगन चौबारे तक,

देखो ऊपर!

आसमान बरसा रहा है

रुई से झक सफेद बर्फ के फाहे,

दोनों बाहें फैलाकर

अपने अंदर बसा लो इस

अलौकिक दृश्य को,

निहारते जाओगे आसमान को

तो महसूस करोगे खुद को

धरती से आसमान की ओर

जाते हुए,

अपनी लघुता एवं क्षुद्रता को

नीचे धरती पर छोड़

ब्रह्माण्ड की लीला में

परम आनंद की अनुभूति

पाते हुए।

                 जितेन्द्र ‘कबीर’

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